अनुसंधान अधिकारी अनूप भार्गव, नईदुनिया, ग्वालियर। क्या अनजाने में लिया जा रहा दैनिक आहार सोरायसिस (त्वचा रोग) या गठिया बीमारियों की ओर तो नहीं धकेल रहा है? इस गंभीर सवाल का उत्तर खोजने के लिए क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, ग्वालियर एक बड़ा अध्ययन शुरू करने जा रहा है।

संस्थान को अनुसूचित जाति उप योजना के तहत केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) से एक विशेष प्रोजेक्ट मिला है, जो मध्य प्रदेश के पांच जिलों में बीमारियों की जड़ की पड़ताल करेगा।

इस विशेष अभियान का आगाज 28 अप्रैल को दतिया जिले से होगा। अनुसंधान दल दतिया के भांडेर, इंदरगढ़ और सेंवढ़ा ब्लाक में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाएगा। इस दौरान टीम न केवल मरीजों के स्वास्थ्य का परीक्षण करेगी, बल्कि स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात एलोपैथी विशेषज्ञों से भी चर्चा कर डेटा साझा करेगी।

दतिया के बाद यह मिशन चरणबद्ध तरीके से शिवपुरी, उज्जैन, सतना और छतरपुर तक पहुंचेगा।

लाइफस्टाइल का भी होगा पोस्टमार्टम

अक्सर सरकारी शिविरों में केवल चेकअप और दवा वितरण तक ही सीमित रहा जाता है, लेकिन यह प्रोजेक्ट विज्ञानी विश्लेषण पर आधारित होगा। इसमें टीम अध्ययन करेगी कि विशिष्ट अंचल के भोजन का वहां की बीमारियों से क्या संबंध है।

मरीजों के सोने-जागने के समय से लेकर उनके काम करने के तौर-तरीकों का डेटा जुटाया जाएगा। अनुसंधान अधिकारी यह पता लगाएंगे कि क्या इन क्षेत्रों में सोरायसिस और जोड़ों के दर्द के मामले असामान्य रूप से बढ़ रहे हैं और इसके पीछे स्थानीय कारण क्या हैं।

भविष्य की ‘हेल्थ पालिसी’ का बनेगा आधार

मेडिकल साइंस में यह माना जाता है कि किसी क्षेत्र विशेष की भौगोलिक स्थिति और डाइट का वहां की बीमारियों से सीधा संबंध होता है। इन शिविरों से प्राप्त रिपोर्ट भविष्य में इन जिलों के लिए विशिष्ट स्वास्थ्य नीति और कस्टमाइज्ड डाइट चार्ट तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगी।

इससे जनता को यह समझने में मदद मिलेगी कि उन्हें अपनी थाली में क्या बदलाव करने की जरूरत है।

इन विशेषज्ञों के हाथ में है कमान

प्रोजेक्ट की कमान अनुभवी अनुसंधान अधिकारियों की टीम संभाल रही है। इसमें प्रधान अन्वेषक डा. अनिल मंगल (अनुसंधान अधिकारी, आयुर्वेद) हैं। सह अन्वेषक के रूप में डा. डीएस रोतकर और डा. एसबी सिंह काम करेंगे।

फैक्ट

लक्ष्य: सोरायसिस और गठिया के बढ़ते मामलों के पीछे खान-पान के प्रभाव को समझना।

दायरा: एमपी के पांच चुनिंदा जिले (दतिया, शिवपुरी, उज्जैन, सतना, छतरपुर)।

विशेषता: एलोपैथी विशेषज्ञों के साथ समन्वय और रूट काज एनालिसिस।

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