इंदौर में बजट सम्मेलन के दौरान राष्ट्रगीत नहीं गाने वाली दो कांग्रेस महिला पार्षदों को हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। इसके अलावा शासन से भी कोर्ट ने जवाब मांगा है। इंदौर खंडपीठ ने प्रमुख सचिव, गृह सचिव सहित अन्य विभागों को सूचना पत्र भेजा है।

 

याचिकाकर्ता एवं एडवोकेट योगेश हेमनानी ने सुनवाई के दौरान पक्ष रखा और कहा कि राष्ट्रीय गीत के दौरान आचरण और अनुशासन को लेकर नियामक ढांचा तैयार नहीं हुआ है। याचिकाकर्ता ने “वंदे मातरम्” को लेकर संविधान के अनुच्छेद 51(ए) का हवाला भी दिया। इस अनुच्छेद के तहत हर भारतीय नागरिक का कर्तव्य है कि वह राष्ट्र के आदर्शों और प्रतीकों का सम्मान करे।इस प्रकरण में हाईकोर्ट ने पार्षद फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल खान को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई पर दोनों को अपना पक्ष रखना होगा।

 

उधर वंदे मातरम् विवाद को लेकर दोनों महिला पार्षदों के खिलाफ एमजी रोड पुलिस ने केस दर्ज किया है। इसके लिए पुलिस ने बीते सप्ताह भर से सबूत एकत्र किए थे। आरोपी महिला पार्षदों से पुलिस ने तीन से चार घंटे तक पूछताछ की थी। यह केस भी कोर्ट में जाएगा।

 

पुलिस ने दोनों महिला पार्षदों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1) (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने व सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने) के तहत केस दर्ज किया है। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर तीन साल की जेल या जुर्माना हो सकता है, या दोनों भी हो सकते हैं।

आपको बता दें कि पार्षद रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम ने सम्मेलन के दौरान राष्ट्रगीत को लेकर टिप्पणी भी की थी। सदन में देरी से आने और वंदे मातरम् गीत में शामिल नहीं होने के मामले में सभापति ने फौजिया को सदन से बाहर भी निकाल दिया था।



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