मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बुधवार को मंत्रालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सीएम हेल्पलाइन और लोक सेवा गारंटी से जुड़े मामलों पर विशेषज्ञ ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समय-सीमा से अधिक लंबित प्रकरणों की हर सप्ताह समीक्षा की जाए और सैंपल जांच के जरिए उनकी गुणवत्ता भी परखी जाए, ताकि नागरिकों को संतोषजनक समाधान मिल सके। बैठक में अनौपचारिक चर्चा में राजस्व और वन विभाग की समस्या को लेकर चर्चा हुई। बैठक में यह भी मुद्दा उठा कि उद्योगों को जमीन आवंटन के बाद भी निर्माण के समय वन विभाग की आपत्तियों से काम अटक जाता है। इस पर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने माना कि विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। वह चीफ कंप्लेंट ऑफिसर बन गए हैं। गांव में वन और राजस्व भूमि को लेकर समस्या की बात कही गई। इस पर बताया गया कि वन विभाग की जमीन पोर्टल पर दर्ज हैं। वहीं, पंचायत विभाग की एसीएस दीपाली रस्तोगी ने कहा कि अधिकारियों के स्तर पर जो जानकारी सामने आ रही है, वह जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाती। उन्होंने कहा कि आम लोगों के लिए जमीन के रिकॉर्ड तक पहुंचना अभी भी मुश्किल है और गांवों में राजस्व व वन भूमि की स्पष्ट स्थिति नहीं है। कई जगहों पर माप में अंतर भी सामने आता है, जिससे विवाद बढ़ते हैं।


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15 अप्रैल तक कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश 

इससे पहले बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रदेश के सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपनी विस्तृत कार्ययोजना और लक्ष्य 15 अप्रैल तक अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि योजनाओं में मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्राथमिकताओं को प्रमुखता से शामिल किया जाए, ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके। मुख्य सचिव ने विभागों से पिछले ढाई वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों और आगामी योजनाओं का ब्यौरा एक सप्ताह के भीतर देने को कहा। साथ ही, 1947 से पहले बने पुराने कानूनों में संशोधन या निरसन की प्रक्रिया को 31 मई तक पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि जरूरत पड़ने पर इन्हें मंत्रिपरिषद में प्रस्तुत किया जा सके।

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ग्रामीण क्षेत्रों में अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव की योजना बनाएं 

बैठक में महिला सशक्तिकरण को लेकर किए गए कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि सफल महिलाओं की कहानियों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचे। जल गंगा संवर्धन अभियान, पेयजल व्यवस्था और गर्मी से जुड़े प्रबंधों की भी समीक्षा की गई। उन्होंने पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने और नए हैंडपंप खनन के लिए शीघ्र एसओपी जारी करने के निर्देश दिए। ग्रामीण क्षेत्रों में अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के लिए योजना बनाने, थाना स्तर पर उपलब्ध संसाधनों की जानकारी एकत्र करने और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। इसके साथ ही एमपी ई-सेवा पोर्टल को और सरल बनाने, कैबिनेट निर्णयों के पालन और न्यायालयीन मामलों में संवेदनशीलता बरतने के निर्देश भी दिए गए।

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