ग्वालियर हाई कोर्ट ने पहाड़ियों पर अतिक्रमण और अवैध खुदाई पर रोक लगाई। प्रशासन जिम्मेदार ठहराया। सर्वे, फेंसिंग और पौधरोपण कर सिटी फॉरेस्ट विकसित करने …और पढ़ें

HighLights
- अवैध खुदाई और अतिक्रमण पर हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई
- बिना अनुमति खुदाई पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश
- पुलिस और माइनिंग विभाग को जिम्मेदार ठहराया गया
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर और आसपास की पहाड़ियों पर बढ़ते अतिक्रमण और अवैध खोदाई को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो ग्वालियर की प्राकृतिक पहाड़ियां पूरी तरह खत्म हो सकती हैं, जिससे शहर का पर्यावरण गंभीर संकट में पड़ जाएगा। अदालत ने बिना वैध अनुमति किसी भी प्रकार की खुदाई पर रोक लगाते हुए जिम्मेदारी सीधे प्रशासन और माइनिंग विभाग पर तय की है।
अवैध खोदाई पर सख्ती के निर्देश
जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने कहा कि शहर की पहाड़ियों पर अवैध गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि गुड़ा गांव सहित कई क्षेत्रों में लैंड माफिया सक्रिय हैं, जो सरकारी जमीन पर कब्जा कर अवैध कॉलोनियां विकसित कर रहे हैं। मिट्टी और पत्थर की अवैध खुदाई से प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंच रहा है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि कहीं अवैध खुदाई पाई गई तो संबंधित पुलिस और खनन विभाग सीधे जिम्मेदार होंगे।
हाई लेवल कमेटी का गठन
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने कलेक्टर ग्वालियर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। इस समिति में नगर निगम, पुलिस, वन विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ कृषि वैज्ञानिक, आयुर्वेद विशेषज्ञ, पशु चिकित्सक और अन्य विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। समिति को शहर की सभी पहाड़ियों का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
सिटी फॉरेस्ट बनाने की योजना
अदालत ने यह भी निर्देश दिए हैं कि पहाड़ियों को फेंसिंग कर सुरक्षित किया जाए और वहां बड़े स्तर पर पौधरोपण किया जाए। नीम, पीपल, फलदार और औषधीय पौधों के रोपण से इन क्षेत्रों को हरित बनाया जाएगा। कोर्ट की मंशा है कि भविष्य में इन पहाड़ियों को सिटी फॉरेस्ट के रूप में विकसित किया जाए, जहां नागरिक मॉर्निंग वॉक, योग और प्रकृति के बीच समय बिता सकें।
