इंदौर के छोटी खजरानी क्षेत्र के वार्ड से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीती निशा देवलिया को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने जिला कोर्ट के निर्वाचन शून्य करने के फैसले को खारिज कर दिया है। अब निशा पार्षद बनी रहेगीी। 

 

यह विवाद नामांकन के दौरान दिए गए शपथ-पत्र में संपत्ति की जानकारी छिपाने और टैक्स विसंगतियों से जुड़ा है। उनकी निकटतम प्रतिद्वंदी नंदिनी मिश्रा ने उनके निर्वाचन को चुनौती देते हुए कोर्ट में याचिका लगाई थी। मिश्रा 1084 मतों से चुनाव हारी थी। उनका आरोप था कि देवलिया ने अपने शपथ-पत्र में जिस भवन को आवासीय बताया, वह वास्तव में व्यावसायिक उपयोग में था और उसके टैक्स भुगतान में भी विसंगतियां थीं। जिला अदालत ने इन दलीलों को आधार मानकर देवलिया की जीत को रद्द करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी को विजेता घोषित कर दिया था।

बाद में मामला हाईकोर्ट पहुँचा तो हाईकोर्ट ने पाया कि जिला कोर्ट का फैसला तथ्यों के आधार पर टिकने योग्य नहीं है और चुनाव को शून्य घोषित करने का आधार अपर्याप्त है। हाईकोर्ट के फैसले को अब सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है, जिससे नंदिनी मिश्रा की अंतिम उम्मीद भी खत्म हो गई है।

 

अब यह स्पष्ट हो गया है कि निशा देवलिया ही वार्ड 44 की निर्वाचित पार्षद बनी रहेंगी। उनके पति रुपेश देवलिया भी पहले इसी वार्ड से पार्षद रह चुके है। वे भाजपा के बागी उम्मीदवार के रुप में भी इस वार्ड से चुनाव जीत चुके है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed