ग्वालियर के पूर्व सीएमएचओ डॉ. सचिन श्रीवास्तव पर 1.08 करोड़ की अनियमितता, एचआरए लेने, जांच में सहयोग न करने सहित पांच गंभीर आरोपों पर विभागीय जांच शुर…और पढ़ें

HighLights
- डॉ. सचिन श्रीवास्तव पर विभागीय जांच शुरू हुई।
- अंधत्व निवारण योजना में 1.08 करोड़ गड़बड़ी आरोप।
- शासकीय आवास के बावजूद एचआरए लेने का आरोप।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। सरकार के अंधत्व निवारण कार्यक्रम में 1 करोड़ 8 लाख से अधिक की गड़बड़ी से लेकर शासकीय आवास के बाद भी एचआरए लेने से लेकर कलेक्टर के चेताने के बाद भी बेपरवाही करने के आरोपों में घिरे पूर्व सीएमएचओ डॉ सचिन श्रीवास्तव पर विभागीय जांच बैठ गई है।
डॉ सचिन पर एक नहीं पांच गंभीर आरोप हैं, जिनका जवाब अब विभाग ने मांगा है। तत्कालीन प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ सचिन श्रीवास्तव के खिलाफ मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत विभागीय जांच होगी।
समय पर जवाब न देने पर होगी कार्रवाई
- वरिष्ठ संयुक्त संचालक (शिकायत), संचालनालय लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा द्वारा जारी पत्र में डॉ श्रीवास्तव पर पांच गंभीर आरोप लगाए गए हैं। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
- आरोप-पत्र के अनुसार राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत अनुमोदित संस्थाओं के चयन, पर्यवेक्षण और भुगतान संबंधी जिम्मेदारी संभालने के दौरान डॉ श्रीवास्तव ने कथित तौर पर समानता समाज सेवी संस्था से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष संबंध होने के बावजूद स्वयं को निर्णय प्रक्रिया से अलग नहीं रखा।
शासन को झेलना पड़ा आर्थिक नुकसान
आरोप है कि संस्था को कार्य आवंटन और वित्तीय लाभ प्राप्त होने दिए गए। जांच में वर्ष 2021 से 2024 के बीच संस्था द्वारा कराई गई मोतियाबिंद शल्यक्रियाओं के लिए लगभग 1.08 करोड़ रुपए के भुगतान में वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के तथ्य प्रथम दृष्टया तथ्य सामने आए हैं। आरोप है कि निगरानी और नियंत्रण में लापरवाही के कारण शासन को आर्थिक नुकसान हुआ।
शासकीय आवास मिलने के बाद भी लेते रहे एचआरए
दूसरे आरोप में कहा गया है कि जुलाई 2024 में शासकीय आवास आवंटित होने के बावजूद डॉ श्रीवास्तव ने मकान किराया भत्ता बंद नहीं कराया और नियमों के विपरीत उसका लाभ लिया। साथ ही शासकीय आवास के लिए देय लाइसेंस शुल्क एवं किराया राशि का समुचित समायोजन नहीं कराया गया, जिससे शासन को आर्थिक हानि हुई।
जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप
विभाग ने आरोप लगाया है कि क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं ग्वालियर द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन पर नियमानुसार कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा जांच के दौरान मांगे गए दस्तावेज और जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई गई तथा जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं दिया गया।
लक्ष्मीगंज प्रसूति गृह की गुमटी मामले में भी घिरे
पांचवें आरोप में कहा गया है कि लक्ष्मीगंज प्रसूति गृह परिसर में गुमटी स्थापना से जुड़े मामले में डॉ श्रीवास्तव अपने दावों के समर्थन में कोई अभिलेखीय साक्ष्य या सक्षम प्राधिकारी के आदेश प्रस्तुत नहीं कर सके। जांच दल को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने और सहयोग नहीं करने को भी गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया है।
नईदुनिया ने जो मुद्दे प्रकाशित किए, वही आरोप पत्र में शामिल
- नईदुनिया ने पूर्व सीएमएचओ डॉ सचिन श्रीवास्तव के संबंध में अंधत्व निवारण कार्यक्रम को लेकर संस्था को एक करोड़ से ज्यादा का भुगतान करने, शासकीय आवास का मामला और लक्ष्मीगंज प्रसूति गृह में गुमटी सहित कई शिकायतों का प्रकाशन प्रमुखता से किया था।
पहले चेतावनी मिली, फिर भी बढ़े सवाल
आरोप-पत्र में उल्लेख है कि डॉ श्रीवास्तव के विरुद्ध पूर्व में की गई शिकायत का निराकरण कलेक्टर ग्वालियर द्वारा करते हुए उन्हें चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद उनके प्रशासनिक कार्यों और आचरण को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े होने पर मामले की पुनः समीक्षा और जांच आवश्यक मानी गई।
