ग्वालियर में 2.83 लाख रुपये का होम लोन चक्रवृद्धि और दंडात्मक ब्याज के कारण 49 लाख रुपये पहुंच गया। उपभोक्ता आयोग ने बैंक को पुनर्गणना और राहत देने के…और पढ़ें

HighLights
- 2.83 लाख का होम लोन 49 लाख तक पहुंचा।
- नियमित किस्तों के बावजूद बढ़ती रही ऋण की राशि।
- आयोग ने चक्रवृद्धि और दंडात्मक ब्याज हटाने को कहा।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जिस बैंक में नौकरी की, उसी बैंक से लिया गया 2.83 लाख रुपये का होम लोन चक्रवृद्धि और दंडात्मक ब्याज के चलते करीब 49 लाख रुपये तक पहुंच गया।
यह मामला सामने आने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने जिला केंद्रीय सहकारी बैंक मर्यादित ग्वालियर को फटकार लगाते हुए 45 दिनों के भीतर ऋण खाते का पुनर्गणना कर चक्रवृद्धि और दंडात्मक ब्याज हटाने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने यह भी कहा कि यदि आवेदक एकमुश्त समझौता योजना का लाभ पाने के पात्र हैं, तो उन्हें नियमानुसार इसका लाभ दिया जाए। लश्कर निवासी अवनी अवस्थी और उनके पति ईशान अवस्थी ने आयोग में परिवाद दायर किया था। ईशान अवस्थी स्वयं जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के कर्मचारी रह चुके हैं।
वर्ष 1996 में लिया था 2.83 लाख रुपये का गृह ऋण
- परिवाद के अनुसार वर्ष 1996 में अवनी अवस्थी ने बैंक से 2.83 लाख रुपये का गृह ऋण लिया था, जिस पर 16 प्रतिशत वार्षिक ब्याज निर्धारित किया गया था। बाद में यह ऋण ईशान अवस्थी के नाम स्थानांतरित हो गया।
लगातार भुगतान के बावजूद ऋण राशि पहुंची 49 लाख रुपये तक
शिकायतकर्ताओं का कहना था कि लगातार भुगतान के बावजूद ऋण राशि बढ़ते-बढ़ते करीब 49 लाख रुपये तक पहुंच गई। इससे उनका ऋण खाता कभी बंद नहीं हो सका और उन्हें अपने वैधानिक लाभ भी नहीं मिल पाए। मामले की शिकायत कलेक्टर स्तर तक की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकलने पर उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
बैंक ने आयोग के समक्ष नहीं रखा कोई जवाब
सुनवाई के दौरान बैंक को नोटिस भेजे गए, लेकिन बैंक की ओर से आयोग के समक्ष न तो कोई जवाब पेश किया गया और न ही कोई दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। ऐसे में आयोग ने शिकायतकर्ताओं के दावों को विश्वसनीय मानते हुए कहा कि नियमित किस्तें जमा होने के बावजूद ऋण खाते में चक्रवृद्धि और दंडात्मक ब्याज लगाना स्पष्ट रूप से सेवा में कमी है।
45 दिन में नया खाता विवरण देने का आदेश
आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने बैंक को 45 दिन के भीतर खाते का नया विवरण उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए सात हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में 1500 रुपये शिकायतकर्ताओं को देने के निर्देश भी दिए हैं।
