स्कूल शिक्षा विभाग की स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है, लेकिन पोर्टल की तकनीकी खामियों और नए दस्तावेजी नियमों ने हजारों शिक्षकों की परेशानी बढ़ा दी है। सबसे बड़ा विवाद पति-पत्नी के आधार पर स्थानांतरण मांगने वाले शिक्षकों के लिए विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को लेकर खड़ा हो गया है। शासकीय शिक्षक संगठन का कहना है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक और कर्मचारी हैं जिनकी शादी 15 से 20 वर्ष पहले हुई थी। उस समय विवाह पंजीयन अनिवार्य नहीं था और न ही विभागीय प्रक्रियाओं में कभी इसकी मांग की गई। अब स्थानांतरण आवेदन के दौरान अचानक विवाह पंजीयन को अनिवार्य कर दिए जाने से हजारों शिक्षक फॉर्म भरने से वंचित हो रहे हैं।

पुराने विवाहित कर्मचारियों के सामने संकट

संगठन के अनुसार ऐसे लोक सेवक, जिनमें पति-पत्नी दोनों शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं या उनमें से एक अन्य विभाग में पदस्थ है, वे पति-पत्नी आधार पर स्थानांतरण का लाभ लेना चाहते हैं। लेकिन पोर्टल विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र के बिना आवेदन स्वीकार नहीं कर रहा। शिक्षकों का कहना है कि उनके पास विवाह से जुड़े अन्य वैध दस्तावेज, सेवा अभिलेख, परिवार समग्र आईडी, नामांकन रिकॉर्ड और शासकीय दस्तावेज उपलब्ध हैं, फिर भी उन्हें आवेदन से वंचित किया जा रहा है।

तकनीकी खामियों से बढ़ी मुश्किल

विवाह पंजीयन के अलावा दिव्यांग शिक्षकों के प्रमाण पत्र, पारस्परिक स्थानांतरण, जिला विकल्पों की अनुपलब्धता और विभिन्न पदों के विकल्प नहीं खुलने जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। इससे बड़ी संख्या में पात्र शिक्षक आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं।

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शिक्षक संगठन ने मांगा वैकल्पिक प्रावधान

शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने मांग की है कि विवाह पंजीयन की अनिवार्यता पर पुनर्विचार किया जाए। जिन कर्मचारियों के पास विवाह पंजीयन उपलब्ध नहीं है, उनके लिए सेवा पुस्तिका, परिवार विवरण, समग्र आईडी, पति-पत्नी की शासकीय सेवा संबंधी जानकारी अथवा अन्य वैध दस्तावेजों के आधार पर आवेदन स्वीकार करने का विकल्प दिया जाए। संगठन ने कहा कि यदि विभाग ने जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनाई तो हजारों शिक्षक केवल दस्तावेजी बाधा के कारण स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे।

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अंतिम तिथि बढ़ाने की भी मांग

शिक्षक संगठन ने शासन से पोर्टल की तकनीकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने, विवाह पंजीयन संबंधी शर्त में संशोधन करने तथा आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि सभी पात्र शिक्षकों को समान अवसर देना विभाग की जिम्मेदारी है और किसी भी शिक्षक को तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों से उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

 



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