सिंहस्थ 2028 को लेकर मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड ने बड़ा कदम उठाया है। ग्वालियर स्थित IITTM के साथ मिलकर उज्जैन के पंडों-पुजारियों और ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों को मेहमाननवाजी और व्यवहार संबंधी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अगस्त 2026 से शुरू होने जा रहा है। हालांकि, सरकार की इस योजना पर अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
पुजारी महासंघ ने जताई नाराजगी
अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी ने इस पहल को पंडों-पुजारियों को बदनाम करने की साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि देश के तीर्थ स्थल आज भी पंडों और पुजारियों की वजह से सुरक्षित और व्यवस्थित हैं। श्रद्धालु दूर-दूर से अपने पारंपरिक पंडों को खोजकर उनके माध्यम से पूजा-अर्चना और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
महेश पुजारी का कहना है कि सिंहस्थ जैसे आयोजनों में कई बार अधिकारियों और पुलिस का व्यवहार ही सवालों के घेरे में रहता है, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आते रहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भीड़ प्रबंधन के नाम पर कई संस्थाएं श्रद्धालुओं को दूर से दर्शन करवाकर बाहर कर देती हैं। ऐसे में पहले अधिकारियों को खुद व्यवहार और प्रबंधन के गुण सीखने चाहिए, उसके बाद दूसरों पर सवाल उठाने चाहिए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि IITTM ने पंडों-पुजारियों की छवि खराब करने का प्रयास किया तो संस्था को मानहानि के मुकदमे और एफआईआर का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही उन्होंने सभी पंडित-पुजारियों से इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल नहीं होने की अपील भी की।
क्या है सरकार का मेगा प्लान?
IITTM के निदेशक डॉ. चंद्रशेखर बरुआ के अनुसार सिंहस्थ 2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। ऐसे में श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव और सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में श्रद्धालुओं को पंडों के रूखे व्यवहार या ड्राइवरों की मनमानी जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े, इसके लिए यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया गया है।
- पहले चरण में 1000 लोगों को मिलेगी ट्रेनिंग
- योजना के पहले चरण में 1000 लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- प्रशिक्षण लेने वालों को प्रतिदिन 400 से 500 रुपये तक स्टाइपेंड दिया जाएगा।
- प्रतिभागियों के रहने और खाने की व्यवस्था भी निशुल्क होगी।
- इसके अलावा फील्ड विजिट और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
पंडों-पुजारियों को क्या सिखाया जाएगा?
प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंडों-पुजारियों को श्रद्धालुओं के साथ विनम्र और सम्मानजनक व्यवहार करने की जानकारी दी जाएगी। तनावपूर्ण परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं की सहायता करने के तरीकों पर विशेष जोर रहेगा। इसके साथ ही भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं को सही मार्गदर्शन देने के बारे में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
ड्राइवरों के लिए भी होगा विशेष प्रशिक्षण
ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों को सुरक्षित ड्राइविंग के नियम सिखाए जाएंगे। उन्हें सही किराया लेने, यात्रियों से मुस्कुराकर संवाद करने और प्राथमिक उपचार यानी फर्स्ट एड की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा GPS के उपयोग और उज्जैन शहर की पूरी जानकारी भी प्रशिक्षण का हिस्सा होगी।
IITTM ने दिया अपना पक्ष
IITTM के निदेशक डॉ. चंद्रशेखर बरुआ ने कहा कि संस्था का उद्देश्य किसी को नीचा दिखाना नहीं है। उन्होंने कहा कि कोशिश यह है कि उज्जैन आने वाला हर श्रद्धालु सम्मान और बेहतर अनुभव के साथ वापस लौटे। उनका कहना है कि श्रद्धालु अपने साथ अच्छी यादें लेकर जाएं, शिकायतें नहीं।
विवाद की असली वजह क्या है?
सरकार का तर्क है कि श्रद्धालुओं से मिली कुछ शिकायतों और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह प्रशिक्षण जरूरी है। वहीं पुजारी महासंघ का कहना है कि कुछ घटनाओं के आधार पर पूरी पुजारी बिरादरी को कटघरे में खड़ा करना गलत है। महासंघ के अनुसार असली समस्या वीआईपी संस्कृति, प्रशासनिक अव्यवस्था और भीड़ प्रबंधन की है, न कि पुजारियों की कार्यप्रणाली।
