नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शिकायतों, जांचों और लगातार उठते सवालों के बीच ग्वालियर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. सचिन श्रीवास्तव को पद से हटाकर उनके मूल पद जिला चिकित्सालय मुरार भेज दिया गया है। वहीं रतलाम के सिविल सर्जन डॉ. मेघ सिंह सागर को ग्वालियर का प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नियुक्त किया गया है। स्वास्थ्य विभाग में हुए इस बदलाव को लंबे समय से चल रहे विवादों और जांचों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

डॉ. श्रीवास्तव के कार्यकाल के दौरान अंधत्व निवारण समिति के माध्यम से अपने रिश्तेदारों से जुड़ी संस्था को कार्य दिए जाने के आरोप सामने आए थे। शिकायतकर्ता ने इस प्रक्रिया में करीब 1.40 करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया था। मामले की शिकायत लोकायुक्त, आर्थिक अपराध ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) और संभागायुक्त कार्यालय तक पहुंची थी, जिसके बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया था। उल्लेखनीय है कि नईदुनिया ने भी इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

नए सीएमएचओ के सामने व्यवस्था सुधारने की चुनौती

डॉ. मेघ सिंह सागर को ग्वालियर का प्रभारी सीएमएचओ बनाए जाने के बाद अब जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने, लंबित मामलों की समीक्षा करने और विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की चुनौती होगी।

विधानसभा में उठा था आउटसोर्स भर्ती का मामला

भितरवार से भाजपा विधायक मोहन सिंह राठौड़ ने स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स भर्ती में कथित अनियमितताओं और घोटाले का मुद्दा विधानसभा में उठाया था। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने के साथ तत्कालीन सीएमएचओ की भूमिका की भी जांच की मांग की थी। इस मुद्दे ने राजनीतिक स्तर पर भी स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया था।

स्वास्थ्य मंत्री ने दिए थे जांच के संकेत

विधानसभा में मामला उठने के बाद प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने भी डॉ. सचिन श्रीवास्तव की भूमिका की जांच कराने की बात कही थी। इसके बाद विभागीय स्तर पर भी मामले की गंभीरता बढ़ गई थी।

आशा प्रशिक्षण के नाम पर रिश्वत मांगने की शिकायत

डॉ. श्रीवास्तव का नाम उस शिकायत में भी सामने आया था जिसमें आशा कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण से जुड़े मामले में डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप लगाए गए थे। शिकायत में कहा गया था कि राशि नहीं देने पर प्रशिक्षण आयोजित नहीं किए जाने की बात कही गई। इस मामले की शिकायत लोकायुक्त संगठन को की गई थी, जिस पर भोपाल स्तर से जांच प्रकरण पंजीबद्ध कर जांच शुरू की गई।



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