फिल्म निर्माता कंपनी ब्लू फॉक्स मोशन पिक्चर प्राइवेट लिमिटेड में निवेश के नाम पर कथित धोखाधड़ी के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी हर्षवर्धन …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 18 Jun 2026 07:29:39 PM (IST)Updated Date: Thu, 18 Jun 2026 07:29:39 PM (IST)

ब्लू फॉक्स मोशन पिक्चर धोखाधड़ी मामला: पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट खारिज, दोबारा जांच के निर्देश
ब्लू फॉक्स मोशन पिक्चर धोखाधड़ी मामला

HighLights

  1. अदालत ने ब्लू फॉक्स मोशन पिक्चर मामले में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट नकारी
  2. थाटीपुर पुलिस को कंपनी के बैंक खातों और एग्रीमेंट की दोबारा जांच के निर्देश
  3. 10 महीने में ढाई गुना रकम का झांसा देकर की गई थी 9.50 लाख की ठगी

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। फिल्म निर्माता कंपनी ब्लू फॉक्स मोशन पिक्चर प्राइवेट लिमिटेड में निवेश के नाम पर कथित धोखाधड़ी के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी हर्षवर्धन धाकड़ की अदालत ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत खात्मा प्रतिवेदन (क्लोजर रिपोर्ट) को अस्वीकार कर दिया है। अदालत ने मामले में विवेचना के निर्देश देते हुए थाना थाटीपुर पुलिस को कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर दोबारा जांच करने को कहा है।

10 माह में ढाई गुना रकम लौटाने का दिया था झांसा

प्रकरण के अनुसार फरियादी प्रमोद कुमार गुप्ता ने ब्लू फॉक्स मोशन पिक्चर प्रालि के डायरेक्टर अशोक विग, मनु प्रशांत विग और अभय दीक्षित सहित अन्य के खिलाफ निवेश के नाम पर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कंपनी के प्रतिनिधियों ने 10 माह में निवेश राशि का ढाई गुना लौटाने का आश्वासन दिया था, जिसके बाद उन्होंने और उनकी पत्नी नीतू गुप्ता ने अपने बैंक खाते से 9.50 लाख रुपये कंपनी के खाते में जमा कराए थे।

दो लाख मिले, फिर भुगतान हुआ बंद और पुलिस ने पेश की क्लोजर रिपोर्ट

प्रारंभ में करीब दो लाख रुपये वापस मिले, लेकिन अप्रैल 2018 के बाद भुगतान बंद हो गया। पुलिस ने मामले में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने का हवाला देते हुए खात्मा प्रतिवेदन पेश किया था। हालांकि सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने आपत्ति जताते हुए कहा कि पुलिस ने कंपनी के बैंक खातों की जांच नहीं की और न ही आरोपितों से पूछताछ की।

अदालत ने पाई जांच में खामियां, ‘प्रॉफिट विद लॉस’ का तर्क खारिज

अदालत ने पाया कि विवेचना के दौरान कंपनी के बैंक खातों में जमा राशि के उपयोग, निवेश की स्थिति और कथित एग्रीमेंट की शर्तों की गहन जांच नहीं की गई। न्यायालय ने कहा कि केवल ‘प्रॉफिट विद लॉस’ का उल्लेख होने मात्र से अपराध न होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। मामले में ऐसी कोई सकारात्मक सामग्री नहीं है, जिससे यह निश्चित रूप से कहा जा सके कि अपराध हुआ ही नहीं।



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