ग्वालियर उपभोक्ता आयोग ने यूरोप टूर पैकेज विवाद में मेक माय ट्रिप को उपभोक्ता को 6 लाख रुपये, 20 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और 2 हजार रुपये वाद व्यय देने …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 17 Jun 2026 12:35:17 PM (IST)Updated Date: Wed, 17 Jun 2026 12:42:47 PM (IST)

यूरोप ट्रिप कैंसिल होने पर युवक ने मेक माय ट्रिप से मांगे 10 लाख, नहीं देने पर खटखटाया कंज्यूमर फॉरम का दरवाजा, मिली जीत
मैक माय ट्रिप को लगा झटका। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. यूरोप टूर रद होने पर उपभोक्ता ने शिकायत दर्ज कराई।
  2. मेक माय ट्रिप ने पूरी राशि लौटाने से इंकार किया।
  3. आयोग ने सेवा में कमी मानते हुए फैसला सुनाया।

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। यूरोप टूर पैकेज रद होने के बाद उपभोक्ता को पूरी राशि वापस नहीं करने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ग्वालियर के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने ऑनलाइन ट्रैवल कंपनी मेक माय ट्रिप को राहत राशि देने का आदेश दिया है। आयोग ने कंपनी को 45 दिन के भीतर उपभोक्ता को 6 लाख रुपये लौटाने, 20 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और 2 हजार रुपये वाद व्यय देने के निर्देश दिए हैं।

मामला ग्वालियर निवासी विकास शर्मा द्वारा दायर परिवाद से जुड़ा है। परिवादी ने जनवरी 2025 में यूरोप यात्रा के लिए मेक माय ट्रिप से लगभग 10.27 लाख रुपये का टूर पैकेज बुक कराया था। उसके बाद में कंपनी ने यात्रा कार्यक्रम में बदलाव की जानकारी देते हुए वैकल्पिक तिथियां प्रस्तावित कीं।

विकास शर्मा ने यात्रा रद्द कर राशि वापस करने की मांग की। परिवादी का आरोप था कि कंपनी ने पूरी राशि लौटाने के बजाय केवल 3.57 लाख रुपये का गिफ्ट वाउचर देने की पेशकश की, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया। कंपनी का तर्क था कि एयर टिकट, होटल और अन्य व्यवस्थाओं पर राशि खर्च हो चुकी थी। वीजा स्वीकृत नहीं होने के कारण यात्रा निरस्त हुई।

आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शर्मा एवं सदस्य रेवती रमण मिश्रा ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि कंपनी यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि उपभोक्ता द्वारा जमा की गई राशि में से कितनी रकम कहां खर्च हुई। आयोग ने माना कि उपभोक्ता को नकद वापसी न करना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।

निर्धारित समय भुगतान न करने पर देना होगा ब्याज

हालांकि आयोग ने यह भी माना कि विदेश यात्रा के लिए वीजा स्वीकृत नहीं होने और यात्रा की पूर्व तैयारियों में कंपनी ने कुछ राशि खर्च की है। ऐसे में पूरी राशि वापसी का दावा उचित नहीं है। इसी आधार पर आयोग ने परिवाद आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए 6 लाख रुपये की वापसी का आदेश दिया। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।



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