मध्य प्रदेश में मानसून का इंतजार और लंबा हो सकता है। मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून फिलहाल तेलंगाना के भद्राचलम क्षेत्र में ठहरा हुआ है, जिसके कारण मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में इसकी प्रगति धीमी पड़ गई है। अब प्रदेश में मानसून के 21 से 23 जून के बीच प्रवेश करने की संभावना जताई जा रही है। मानसून में देरी का असर कृषि गतिविधियों पर भी दिखाई देने लगा है। खरीफ फसलों की बोवनी का इंतजार कर रहे किसानों की नजरें अब मानसूनी बारिश पर टिकी हैं।

34 जिलों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट

मौसम विभाग ने बुधवार को ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, सीहोर, देवास, शाजापुर, राजगढ़, आगर-मालवा, उज्जैन, इंदौर, खरगोन, नीमच और मंदसौर जिलों में आंधी और बारिश की संभावना जताई है। दूसरी ओर भोपाल, विदिशा, रायसेन, सागर, दमोह, जबलपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, शहडोल, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार और बड़वानी समेत कई जिलों में मौसम शुष्क रहने और गर्मी का असर बने रहने की संभावना है।

सीधी में सबसे ज्यादा बारिश, कई जिलों में चली आंधी

मंगलवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां जारी रहीं। सीधी जिले में करीब एक इंच वर्षा दर्ज की गई। बैतूल, रीवा और सतना में भी आधा इंच या उससे अधिक बारिश हुई। रायसेन, छिंदवाड़ा, ग्वालियर और सागर समेत कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर देखने को मिला। बारिश और बादलों के कारण कई जिलों में दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। शिवपुरी में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि पचमढ़ी में 35.4, सिवनी में 36.4 और बैतूल में 36.5 डिग्री दर्ज किया गया। सबसे अधिक तापमान खजुराहो और नौगांव में 42.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। प्रदेश के प्रमुख शहरों में भोपाल का अधिकतम तापमान 37 डिग्री, इंदौर 37.3 डिग्री, उज्जैन 38.5 डिग्री, ग्वालियर 39.5 डिग्री और जबलपुर 40.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

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सामान्य तारीख निकल गई, एक सप्ताह पीछे मानसून

आमतौर पर मध्य प्रदेश में मानसून 15 जून तक प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है। पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2021 में मानसून सबसे जल्दी 9 जून को पहुंच गया था, जबकि 2018 में इसकी एंट्री 25 जून को हुई थी। वर्ष 2025 में मानसून 16 जून को प्रदेश पहुंचा था। मौसम विभाग के अनुसार इस बार मानसून करीब एक सप्ताह देरी से पहुंच सकता है। इसका असर जून महीने की कुल वर्षा पर भी दिखाई दे रहा है। 1 से 16 जून के बीच प्रदेश में सामान्य से लगभग 35 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थिति और अधिक चिंताजनक है, जहां सामान्य बारिश का आधा आंकड़ा भी नहीं पहुंच पाया है।

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इन जिलों में सामान्य से कम बारिश

अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मऊगंज, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, अलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, बुरहानपुर, दतिया, देवास, धार, ग्वालियर, इंदौर, झाबुआ, खरगोन, रतलाम, उज्जैन और विदिशा जिलों में अब तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। मानसून की एंट्री के बाद ही इन क्षेत्रों में बारिश का आंकड़ा सुधरने की उम्मीद है।



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