मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के विकास, स्वास्थ्य सेवाओं, जनजातीय कल्याण, वन्यजीव संरक्षण और रोजगार सृजन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के लिए कुल 24 हजार 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत कर प्रदेश के समग्र विकास को नई गति देने का निर्णय लिया। बैठक में सबसे बड़ा फैसला इंदौर मेट्रो रेल परियोजना को लेकर लिया गया। परियोजना की बढ़ी हुई लागत और अतिरिक्त वित्तीय आवश्यकताओं को देखते हुए सरकार ने कुल 19 हजार 472 करोड़ 29 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की। इससे प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी शहरी परिवहन परियोजनाओं में शामिल इंदौर मेट्रो को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

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स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा कदम

कैबिनेट ने प्रदेश में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए “मध्यप्रदेश (परोपकारी संस्थाओं के लिए) मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026” के प्रस्ताव पर विचार करते हुए पांच सदस्यीय मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया है। यह समिति सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों की स्थापना, चिकित्सा शिक्षा के विस्तार, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और गरीब मरीजों को बेहतर इलाज सुनिश्चित करने जैसे विषयों पर अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगी। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से रीवा, देवास और गुना के चयनित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स मॉडल पर संचालित करने की पायलट परियोजना को भी मंजूरी दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण जनता को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी और जिला अस्पतालों पर दबाव कम होगा। 

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वन्यजीव संरक्षण और ग्राम पुनर्वास के लिए 2,381 करोड़ रुपये

वन विभाग के अंतर्गत प्रोजेक्ट टाइगर एवं एलिफेंट तथा संरक्षित क्षेत्रों में बसे गांवों के पुनर्वास के लिए कैबिनेट ने 2 हजार 381 करोड़ 15 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। यह राशि वर्ष 2026 से 2031 तक पांच वर्षों की अवधि में खर्च की जाएगी। योजना के तहत टाइगर रिजर्व, कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर अभयारण्य में वन्यजीव संरक्षण, आवास सुधार, जल स्रोत विकास, सुरक्षा व्यवस्था और हाथियों के संरक्षण संबंधी कार्य किए जाएंगे। वहीं संरक्षित क्षेत्रों के 94 गांवों के पुनर्वास और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की व्यवस्था भी की जाएगी। 

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श्रमिक कल्याण योजनाओं को मिला बल

कैबिनेट ने श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं के संचालन के लिए 531 करोड़ 78 लाख रुपये मंजूर किए हैं। यह राशि श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, औद्योगिक सुरक्षा, श्रमिक कल्याण योजनाओं, बाल श्रमिक पुनर्वास, प्रवासी श्रमिक आयोग और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए खर्च की जाएगी। 

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जनजातीय विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं

जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों की शिक्षा और आवासीय सुविधाओं को मजबूत करने निर्णय लिया है। कैबिनेट ने जनजातीय कार्य विभाग की एच्छिक संस्थाओं को शैक्षणिक और अन्य कल्याणकारी प्रवृत्तियों के लिए अनुदान संबंधी योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च 2031 में निरंतर संचालन के लिए 687 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की है। इस राशि का उपयोग 22 जिलों में संचालित छात्रावासों, आश्रम शालाओं, बालवाड़ियों और अन्य शैक्षणिक संस्थाओं के संचालन तथा कर्मचारियों के वेतन-भत्तों के लिए किया जाएगा। 

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रेशम उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

प्रदेश में रेशम उत्पादन और उससे जुड़े रोजगार को प्रोत्साहन देने के लिए कैबिनेट ने 639 करोड़ 25 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। इससे रेशम समृद्धि योजना, टसर रेशम विकास कार्यक्रम, विपणन अधोसंरचना निर्माण और क्लस्टर विकास कार्यक्रमों को गति मिलेगी। सरकार का लक्ष्य रेशम उत्पादकों, बुनकरों और उद्यमियों की आय में वृद्धि करना है।

स्थानीय निकायों की ऑडिट व्यवस्था होगी मजबूत

वित्त विभाग के अंतर्गत संचालित स्थानीय निधि संपरीक्षा संचालनालय और विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए 492 करोड़ 45 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। इससे स्थानीय निकायों की वित्तीय पारदर्शिता और लेखा परीक्षण व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सकेगा। कैबिनेट के इन निर्णयों को प्रदेश के बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं से आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश के समावेशी और सतत विकास को नई मजबूती मिलेगी।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन आउटसोर्स प्रणाली से होगा 

रीवा, देवास और गुना में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स माध्यम से संचालित किए जाने के पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। 

कैबिनेट ने रीवा, देवास तथा गुना में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन आउटसोर्स प्रणाली से किए जाने संबंधी पायलट परियोजना संचालित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की है। प्रदेश के कुल तीन ज़िलों रीवा, देवास तथा गुना में चिह्नित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों जहाँ चिकित्सकों के अधिकांश पद रिक्त है, उनका संचालन आउटसोर्स प्रणाली से किए जाने हेतु पायलट परियोजना संचालित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। उक्त प्रणाली अंतर्गत संदर्भित संस्थाओं के संचालन के लिए निविदा के निर्माण एवं समापक रूप प्रदायगी का कार्य दायित्व लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को प्रदत्त किए जाने एवं निविदा प्रक्रिया एमपीपी एचएससीएल के माध्यम से किए जाने के लिए स्वीकृति प्रदान की गई है।

 



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