बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय (बीयू) में व्याप्त प्रशासनिक और अकादमिक अव्यवस्थाओं को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने गुरुवार से विश्वविद्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। परिषद ने कुलपति के इस्तीफे और विश्वविद्यालय में धारा-52 लागू कर शासन से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए छात्रों की समस्याओं के निराकरण की मांग उठाई।
परीक्षा परिणामों में देरी से छात्रों में नाराजगी
एबीवीपी का आरोप है कि एमबीए प्रथम और तृतीय सेमेस्टर सहित कई स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के परीक्षा परिणाम महीनों से लंबित हैं। पुनर्मूल्यांकन के नतीजे भी लंबे समय से घोषित नहीं किए गए हैं, जिससे विद्यार्थियों का शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य प्रभावित हो रहा है। परिषद का कहना है कि विश्वविद्यालय का अकादमिक कैलेंडर पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है।
पीएचडी प्रवेश और भर्ती प्रक्रिया भी प्रभावित
विद्यार्थी परिषद ने आरोप लगाया कि लंबे समय से पीएचडी प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन नहीं किया गया है। वहीं शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया भी लंबित है। परिषद का कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण छात्रों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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छात्रावास और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
एबीवीपी ने छात्रावासों की बदहाल स्थिति, परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और नर्सिंग कॉलेजों की प्रवेश प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर भी नाराजगी जताई है। परिषद का कहना है कि छात्रों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। विश्वविद्यालय की संबद्धता प्रक्रिया, टेंडरों, गोपनीय प्रिंटिंग कार्यों और अन्य प्रशासनिक फैसलों में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। एबीवीपी का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था से छात्र, शिक्षक, कर्मचारी और संबद्ध महाविद्यालय सभी प्रभावित हो रहे हैं।
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कुलपति के इस्तीफे तक जारी रहेगा आंदोलन
एबीवीपी ने स्पष्ट किया है कि जब तक कुलपति इस्तीफा नहीं देते और छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। परिषद ने कहा कि विश्वविद्यालय में जवाबदेही तय किए बिना हालात नहीं सुधरेंगे।
