राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद कांग्रेस ने विरोध की लड़ाई सड़क से लेकर अदालत तक ले जाने का ऐलान कर दिया है। बुधवार को राजधानी के रोशनपुरा चौराहे पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उपवास शुरू कर चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। धरना-उपवास में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, अरुण यादव, आरिफ मसूद, आतिफ अकील समेत बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने नामांकन निरस्त करने की कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए इसे राजनीतिक दबाव का परिणाम बताया।
खरीद-फरोख्त नहीं हुई तो अपनाया दूसरा रास्ता
कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने आरोप लगाया कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन तकनीकी आधार पर गलत तरीके से निरस्त किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा को जब यह महसूस हुआ कि कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट हैं और किसी तरह की टूट-फूट संभव नहीं है, तब प्रशासनिक और कानूनी रास्तों का सहारा लेकर प्रत्याशी को चुनाव से बाहर करने की कोशिश की गई।
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दिल्ली में रणनीति, सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
कांग्रेस अब इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर भी उठाने की तैयारी में है। पार्टी का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात कर अपनी आपत्ति दर्ज करा रहा है। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा के साथ कानूनी विकल्पों पर मंथन चल रहा है। पार्टी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में भी जुटी है।
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राजनीतिक लड़ाई अब और तेज होगी
नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। मंगलवार देर रात तक निर्वाचन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने के बाद अब पार्टी ने उपवास, चुनाव आयोग में शिकायत और न्यायालय की शरण लेने जैसे विकल्पों पर एक साथ काम शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मामला प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है।
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के विरोध में कांग्रेस ने भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर उपवास शुरू कर दिया है। दिग्विजय सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता इसमें शामिल हुए। पार्टी चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देने के साथ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी भी कर रही है।
