मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की दो सीटों का गणित लगभग स्पष्ट नजर आ रहा है, लेकिन अब तीसरी सीट पर भी भाजपा ने उम्मीदवार के नाम का एलान कर दिया है। मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है। केवट मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष है। दिल्ली से मिली हरी झंडी मिलने के बाद सीएम हाउस में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया है। वहीं, कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने और किसी भी तरह की टूट-फूट की आशंकाओं को खत्म करने में जुटी हुई है। 

सोमवार को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है। इससे पहले राजधानी भोपाल में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के शीर्ष नेताओं की बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। भाजपा के कई वरिष्ठ नेता रविवार को भोपाल में डटे रहे और केंद्रीय नेतृत्व के साथ लगातार संपर्क में बने रहे। बताया जा रहा है कि भाजपा ने एससी, एसटी और पिछड़ा वर्ग में अति पिछड़ी जाति के नेताओं के नाम पर मंथन किया है। इसके बाद  महेश केवट के नाम पर सहमति बनी। केवट मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष है। वह मीनाक्षी नटराजन के सामने सोमवार को नामांकन दाखिल कर सकते हैं। 

कांग्रेस नेता भी पूरी तरह सतर्क 

भाजपा के द्वारा तीसरा उम्मीदवार की घोषणा के बाद कांग्रेस नेतृत्व पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दावा किया है कि पार्टी के सभी विधायक एकजुट हैं और राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन को पूरा समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में किसी तरह की टूट या क्रॉस वोटिंग की संभावना नहीं है और पार्टी अपने उम्मीदवार को मजबूती के साथ विजयी बनाएगी। वहीं, यह भी चर्चा है कि कांग्रेस अपने विधायकों की बाड़ाबंदी पर विचार कर रही है और सभी विधायकों को तेलंगाना भेज सकती है। मीनाक्षी नटराजन तेलंगाना की प्रदेश प्रभारी है। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता लगातार विधायकों के संपर्क में हैं। प्रदेश नेतृत्व के साथ-साथ पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं से भी चर्चा का दौर जारी है। कांग्रेस की कोशिश है कि चुनाव तक संगठनात्मक एकजुटता का स्पष्ट संदेश जाए और किसी भी तरह की राजनीतिक अटकलों को हवा न मिले।

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क्या कहता है चुनावी गणित?

विधानसभा में वर्तमान में 228 सदस्य मतदान के पात्र हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की आवश्यकता है। भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 63  विधायक हैं। दो सीटों पर अपने उम्मीदवारों को निर्वाचित कराने के बाद भाजपा के पास लगभग 48 वोट बचेंगे। ऐसे में तीसरी सीट जीतने के लिए उसे अतिरिक्त 10 वोटों की जरूरत होगी। यही वजह है कि कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग की आशंका और भाजपा की संभावित रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। 

 



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