चिंता की बात यह है कि पिछले सर्वे (2019-21) के मुकाबले इस बार कम वजन वाले लोगों का प्रतिशत बढ़ गया है। …और पढ़ें

HighLights
- एनएफएचएस-6 2023-24 के आंकडों आई स्थिति सामने
- गांवों में पौष्टिक आहार की कमी, तो शहरों में जंक फूड से बढ़ा मोटापा
- दोनों के बिगड़े सहेत संतुलन से दिल की बीमारियों का बढ़ा खतरा
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। प्रदेश में स्वास्थ्य संकट अब केवल कुपोषण तक सीमित नहीं रहा। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6 2023-24) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश एक साथ दो विपरीत चुनौतियों से जूझ रहा है।
गांवों में बड़ी आबादी पर्याप्त पोषण नहीं मिलने से कम वजन की समस्या से ग्रस्त है, जबकि शहरों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। सर्वेक्षण के अनुसार 15 से 49 वर्ष के आयु वर्ग में पर्याप्त पोषण की कमी साफ दिखाई दे रही है। चिंता की बात यह है कि पिछले सर्वे (2019-21) के मुकाबले इस बार कम वजन वाले लोगों का प्रतिशत बढ़ गया है।
26.5% महिलाओं में कम वजन
प्रदेश की कुल 26.5% महिलाएं कम वजन की समस्या से जूझ रही हैं। 2019-21 में यह आंकड़ा 23 प्रतिशत था। ग्रामीण क्षेत्रों में 29.9 प्रतिशत महिलाएं सामान्य बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) से कम वजन की हैं, जबकि शहरों में यह आंकड़ा 17.4 प्रतिशत है। प्रदेश के 28.3 प्रतिशत पुरुष अंडरवेट श्रेणी में हैं, जबकि पिछले सर्वे में यह आंकड़ा केवल 20.8 प्रतिशत था। गांवों में 30.7 प्रतिशत और शहरों में 21.9 प्रतिशत पुरुष कम वजन के शिकार हैं।
शहरों को बीमार बना रहा है मोटापा: एक तरफ जहां आधी आबादी पोषण के अभाव में कमजोर हो रही है, वहीं दूसरी ओर शहरों में ओवरवेट और मोटापे के मामले भी बढ़े हैं। शहरी क्षेत्रों की 36.1 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में आ चुकी हैं।
यदि पूरे प्रदेश की बात करें तो मोटापे से पीड़ित महिलाओं का ग्राफ 16.6 प्रतिशत से बढ़कर अब 22.2 प्रतिशत हो गया है। शहरी क्षेत्रों के 26.9 प्रतिशत पुरुष मोटापे से प्रभावित हैं। राज्य स्तर पर ओवरवेट पुरुषों का आंकड़ा 15.6 प्रतिशत से बढ़कर 17.6 प्रतिशत पहुंच गया है।
विशेषज्ञ की राय: ग्रामीण क्षेत्रों में संतुलित और पौष्टिक आहार की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिससे लोग अंडरवेट हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, शहरों में बदलती जीवनशैली, शारीरिक श्रम या वर्कआउट की कमी और फास्ट फूड, जंक फूड का बढ़ता चलन लोगों को मोटापे की ओर धकेल रहा है, जो आगे चलकर हाई बीपी, डायबिटीज और दिल की बीमारियों का बड़ा कारण बन सकता है। – डॉ. गौरव कवि भार्गव, ह्दय रोग विशेषज्ञ
