मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ-साथ सौर ऊर्जा के उपयोग को तेजी से बढ़ावा दिया जाए। किसानों के लिए सोलर पंप और ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों तक घरेलू उपभोक्ताओं को सोलर उपकरण आसानी से उपलब्ध कराए जाएं। मुख्यमंत्री शुक्रवार को मंत्रालय में ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि बिजली व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से और मजबूत बनाया जाए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में ड्रोन आधारित पेट्रोलिंग के जरिए बिजली लाइनों की निगरानी की जा रही है, जिससे लाइन ट्रिपिंग में 35 प्रतिशत तक कमी आई है। वर्तमान में 400 और 132 केवी के करीब 23 हजार टावरों की निगरानी ड्रोन से की जा रही है। वहीं भोपाल, इंदौर, जबलपुर और दमोह में इंसुलेटेड वर्क प्लेटफॉर्म तकनीक के जरिए चालू लाइन पर सुरक्षित तरीके से काम किया जा रहा है। 

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बैठक में जानकारी दी गई कि 14 जनवरी 2026 को प्रदेश में 19 हजार 895 मेगावॉट बिजली आपूर्ति का रिकॉर्ड बनाया गया, जो अब तक की सबसे अधिक पूर्ति है। ट्रांसमिशन हानि घटकर 2.60 प्रतिशत रह गई है, जबकि पारेषण उपलब्धता 99.52 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ऊर्जा विभाग की समाधान योजना 2025-26 के तहत उपभोक्ताओं को बिजली बिल के सरचार्ज में राहत दी गई। इस योजना में 1,970 करोड़ रुपये की देनदारियों का निराकरण किया गया और 473 करोड़ रुपये का सरचार्ज माफ किया गया। प्रदेश में अब तक 40 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जबकि 47 हजार से ज्यादा सरकारी मीटर प्रीपेड मोड पर संचालित हो रहे हैं। 

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प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में भी तेजी से वृद्धि हुई है। मार्च 2024 में कुल ऊर्जा उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 33 प्रतिशत हो गई। वर्तमान में प्रदेश में 8,608 मेगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है, जिसमें 5,376 मेगावॉट सौर ऊर्जा शामिल है। मुख्यमंत्री ने विशेष पिछड़ी जनजातियों बैगा, सहरिया और भारिया समुदाय के घरों में विद्युतीकरण के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि सभी पात्र परिवारों तक बिजली सुविधा पहुंचाई जाए। बैठक में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



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