राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत मध्य प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब आंगनवाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों को एक ही परिसर में संचालित करने की व्यवस्था लागू की जा रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत शुरू किए गए इस को-लोकेशन मॉडल का उद्देश्य बच्चों को बेहतर शिक्षा, पोषण और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है।
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नई व्यवस्था के तहत उन आंगनवाड़ी केंद्रों को प्राथमिक स्कूल परिसरों में स्थानांतरित किया जा रहा है, जो स्कूलों के पास स्थित हैं और जहां अतिरिक्त कक्ष उपलब्ध हैं। इससे बच्चों को शुरुआत से ही स्कूल का माहौल मिलेगा और पहली कक्षा में प्रवेश के समय झिझक व डर कम होगा। सरकार का मानना है कि इससे शुरुआती कक्षाओं में ड्रॉपआउट की समस्या भी घटेगी। इस मॉडल के जरिए आंगनवाड़ी और स्कूल शिक्षा विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है। बच्चों को स्कूलों के खेल मैदान, शैक्षणिक संसाधन और अन्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा। साथ ही आधारशिला और जादुई पिटारा जैसे खेल आधारित शिक्षण कार्यक्रमों का साझा उपयोग कर शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया जा रहा है। भौगोलिक कारणों से जहां आंगनवाड़ी और स्कूल को एक परिसर में लाना संभव नहीं है, वहां डिजिटल मैपिंग के जरिए दोनों संस्थानों को जोड़ा जा रहा है। इससे बच्चों के रिकॉर्ड और योजनाओं का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा।
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इसी पहल को मजबूत बनाने के लिए मध्य प्रदेश में विद्यारंभ प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। प्रदेश के 94 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों में आयोजित इस अभियान के तहत 5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के करीब 9.28 लाख बच्चों को औपचारिक शिक्षा की शुरुआत के लिए प्रमाण पत्र दिए गए। इस तरह का प्रदेशव्यापी आयोजन करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बना है।
