यह जिले का पहला रीजनल ड्राइविंग सेंटर है जिसकी स्वीकृति के बाद रेलवे की चौथी लाइन का पेच उलझ रहा है। …और पढ़ें

HighLights
- मुरार के बेहटा के पास चक केशोपुरा गांव क्षेत्र का मामला
- रेलवे व कलेक्टर को ट्रेनिंग सेंटर के डायरेक्टर ने लिखा पत्र
- रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मुरार के बेहटा गांव के चक केशोपुरा से बीना-झांसी-धौलपुर रेलवे की चौथी लाइन प्रस्तावित है, यहीं चेक केशोपुरा में ही तीन एकड़ में केंद्रीय परिवहन मंत्रालय की स्वीकृति से रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर तैयार हो रहा है। यह जिले का पहला रीजनल ड्राइविंग सेंटर है जिसकी स्वीकृति के बाद रेलवे की चौथी लाइन का पेच उलझ रहा है।
रीजनल ड्राइविंग सेंटर जिस संस्था को स्वीकृत किया गया है उसकी ओर से रेलवे के अधिकारियों व जिला प्रशासन ग्वालियर को पत्र लिखकर अनुरोध किया गया है कि केंद्रीय परिवहन मंत्रालय की स्वीकृति से यहां रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर प्रस्तावित है जिसका निर्माण शुरू कर दिया गया है, यह पूर्व से स्वीकृत है। इसी कारण इस स्थल को रेलवे की चौथी लाइन से अलग रखा जाए।
बता दें कि केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा रीजनल ड्राइविंग सेंटर पीपीपी माडल पर संचालन की स्वीकृति 23 जुलाई 2025 द्वारा प्रदान की गई है। ग्राम चक कैशोपुर की सर्वे भूमि नंबर 559/1 एवं 560 में से तीन एकड़ भूमि केंद्र-राज्य सरकार के पास दृष्टिबंधक रखी गई है।
रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर को संचालित करने के लिए केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (रोड सेफ्टी सेल) के अंडर सेक्रेटरी एवं मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को शामिल करते हुए एक सोसाइटी का पंजीयन कराया गया। पांच करोड़ 50 लाख रुपये रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर के निर्माण के लिए स्वीकृत कर दिए हैं। रेलवे और प्रशासन के अफसरों को भेजे पत्र में यह भी बताया है कि मुख्य परियोजना प्रबंधक निर्माण, उत्तर-मध्य रेल झांसी द्वारा कलेक्टर ग्वालियर को बीना-झांसी-धौलपुर रेल निर्माण के संबंध में पत्र भेजा जा चुका है। पत्र में रीजनल ड्राइविंग सेंटर के सर्वे नंबरों को रेलवे की चौथी लाइन प्रोजेक्ट से अलग रखने का अनुरोध किया गया है।
सड़क दुघर्टना कम हों इसलिए खुल रहे सेंटर
सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, केंद्र सरकार द्वारा वाहन चालकों को कुशलतापूर्वक वाहन चलाने का प्रशिक्षण देने के लिए विभिन्न स्थानों में इंस्टीट्यूट आफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एण्ड रिसर्च (आइडीटीआर), रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (आरडीटीसी) एवं डिस्ट्रिक्ट ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (डीटीसी) के रूप में प्रादेशिक, संभागीय, जिला स्तर पर त्रिस्तरीय चालक प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना करने का निर्णय लिया गया है।
गौरीश टेक्नोलाजीस को मिली है स्वीकृति
रीजनल ड्राइविंग सेंटर की स्वीकृति गौरीश टेक्नोलाजीस प्राइवेट लिमिटेड को मिली है, जिसमें विश्वनाथ प्रताप सिंह डायरेक्टर हैं एवं अनुराग प्रताप सिंह सहित अन्य शामिल हैं।
