सोलर प्लांट लगाने के बाद नेट मीटरिंग से लेकर विद्युत वितरण कंपनी के साथ होने वाले सारे अनुबंध व एनओसी की प्रक्रिया भी ठेकेदार एजेंसी द्वारा की जाएगी। …और पढ़ें

HighLights
- मानपुर की पहाड़ी पर लगेगा 2.4 मेगावाट का प्लांट
- ठेकेदार ही करेगा 10 साल तक मेंटेनेंस
- एनर्जी ऑडिट और स्मार्ट मीटर से मिली सफलता
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। बिजली के बिलों के भुगतान में चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि समायोजित होने के कारण नगर निगम में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में निगमायुक्त संघ प्रिय ने एनर्जी आडिट की कवायद शुरू की है। अभी तक एनर्जी आडिट व कनेक्शनों का लोड कम कराने के साथ ही बोरिंग बंद कराने से निगम को सालाना दो करोड़ रुपये के बिल की बचत हो रही है।
अब इसी क्रम में नगर निगम के अधिकारियों ने बिल की राशि को और कम करने के लिए नया प्लान तैयार किया है। इसके अंतर्गत स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन से मिली 10 करोड़ रुपये की राशि से मानपुर स्थित पहाड़ी पर 2.4 मेगावाट का सोलर प्लांट लगाया जाएगा। इससे तैयार होने वाली बिजली को बिजली कंपनी को वापस देकर नगर निगम के बिजली के बिल में हर साल दो करोड़ रुपये की राशि कम हो जाएगी।
दरअसल, नगर निगम द्वारा पिछले छह माह से एनर्जी आडिट की कवायद शुरू की गई है। इसके अंतर्गत बिजली के बिलों को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं, क्योंकि राज्य शासन से मिलने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि में से बिजली के बिल की कटौती कर ली जाती है। इससे नगर निगम को कम राशि प्राप्त होती है। शासन स्तर से नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बिजली के बिल की राशि कम करने के निर्देश दिए गए थे, जिसके बाद ग्वालियर में भी इसके प्रयास किए गए और सफलता भी मिल रही है। निगम ने अपने सीवर ट्रीटमेंट और वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों सहित अन्य एचटी कनेक्शनों का लोड चेक कराने के साथ ही जरूरत के मुताबिक उन्हें कम भी कराया है, जिससे निगम को लगभग सवा करोड़ रुपये की बचत हुई है।
प्लांट लगाकर देगा ठेकेदार, 10 साल मेंटेनेंस भी करेगा
वर्तमान में नगर निगम द्वारा सोलर प्लांट के लिए जो शर्तें रखी गई हैं, उनके मुताबिक 10 करोड़ रुपये की राशि से ठेकेदार एजेंसी को प्लांट लगाकर देना होगा। इसके अलावा 10 साल तक उसका संचालन एवं संधारण (ओएंडएम) भी करना होगा। वहीं प्लांट लगाने के बाद नेट मीटरिंग से लेकर विद्युत वितरण कंपनी के साथ होने वाले सारे अनुबंध और एनओसी आदि की प्रक्रिया भी ठेकेदार एजेंसी द्वारा की जाएगी। प्लांट के शुरू होने के बाद उससे पैदा होने वाली बिजली को विद्युत वितरण कंपनी के ग्रिड में दिया जाएगा और उत्पादित बिजली की राशि नगर निगम के बिल में से विद्युत वितरण कंपनी को कम करनी होगी।
स्मार्ट मीटरों से भी बचाए छह माह में 25 लाख रुपये
ऊर्जा बचत की दिशा में ही नगर निगम ने अपने छोटे विद्युत कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर लगवाए। एनर्जी आडिट का कार्य कर रही फर्म मैसर्स शिनफील्ड इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड ने 1300 से अधिक कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर लगाए, जिनमें से 550 से अधिक स्मार्ट मीटरों के आधार पर मार्च 2026 माह के विद्युत बिल जारी किए गए थे। इन स्मार्ट मीटरों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 में कुल विद्युत बिल की राशि 79.53 लाख रुपये रही, जबकि पूर्व में सितंबर 2025 माह में यह राशि 1.04 करोड़ रुपये से अधिक थी। इस प्रकार मात्र छह माह में ही लगभग बिजली बिल के 25 लाख रुपये की बचत दर्ज की गई।
