नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। समान नागरिक संहिता यूसीसी (UCC) समान अधिकार देगा। यह सम्मान और समानता की बात करता है, कोने कोन तक पहुंचाकर लोगों को इसके बारे में बताना चाहिए जिससे हर किसी को इसकी जानकारी हो। महिलाओं और बच्चों के अधिकार को लेकर भी चिंता सामने आई। प्रबुद्वजनों ने एक स्वर में कहा कि यूसीसी कानून को लागू किया जाना चाहिए।

ग्वालियर के बाल भवन सभागार में गुरुवार को यूसीसी को लेकर गठित उच्च स्तरीय समिति के साथ प्रबुद्वजन व नागरिकों का जन परामर्श हुआ जिसमें बढ़चढ़कर लोगों ने हिस्सा लिया और अपने अहम सुझाव भी दिए। बाल भवन का सभागार खचाखच भरा हुआ था जिसमें जनप्रतिनिधियों के साथ जिले के अधिकारीगण भी मौजूद रहे।

प्रबुद्वजन और नागरिकों की सुनिएं…

यूसीसी लागू करना चाहिए,यह समान अधिकारों की बात करता है। जहां भी महिलाओं की बात आती है इसमें परंपरा बदलना होगी। बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए खासकर यूसीसी लागू होना चाहिए।- संदीपा मल्होत्रा, समाजसेविका

  • जनअभियान परिषद के साथ समान नागरिक संहिता को लेकर हमने पिछले दिनों काम किया है। समान नागरिक संहिता में नागरिकों को समान कानून मिले यही सुझाव है। महिलाअों के समान अधिकार सुरक्षित हों।- हरिओम गौतम, सामाजिक कार्यकर्ता

यूसीसी का प्रारूप जनता के सामने रखना चाहिए जिससे सभी को इसके बारे में अच्छे से पता चल सके। सभी वर्गों की राय को शामिल किया जाना चाहिए। महिलाआें और बच्चों के अधिकार की बात हो और सभी की सहमति हो। – राजेश बाबू, कांग्रेस नेता

  • संविधान के अनुरूप सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलने चाहिए, भारत की धार्मिक स्वतंत्रता से लेकर अधिकारों की बात होते हुए समान रूप से इसका क्रियान्वयन हो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। किसी की जीत-हार जैसी बात न हो। – अजय चोपड़ा, प्रतिनिधि,कैट

यूसीसी का क्रियान्वयन समान रूप से होना चाहिए और चरणबद्व ढंग से किया जाना चाहिए। इसमें भारत के नागरिकों के कर्तव्यों का पूरी तरह ध्यान रखा जाए। लोगों तक सरल ढंग से भी यह संहिता पहुंचना जरूरी है। – निशिकांत मोघे, मीडिया प्रभारी, जिला भाजपा

  • कई बार अलग अलग राज्यों में ऐसी स्थिति बनी कि इसकी जरूरत महसूस की गई। कानून हो समान रूप से हो। हिंदू विवाह में एक विवाह की अनुमति है, लिवइन में लोग रहते हैं इसमें पंजीकरण आवश्यक है। बेटे-बेटी बालिग होकर शादी कर लेते हैं इसमें माता पिता की सहमति होना चाहिए।- बसंत गोडयाले,सामाजिक कार्यकर्ता

गांव गांव में भी समान नागरिक संहिता के बारे में बताया जाना चाहिए। इसको लेकर बैठकों का आयोजन किया जाना चाहिए जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इस कानून के बारे में पता होना चाहिए।- अमृता,भाजपा नेता,ग्रामीण

  • हमें किसी भी वर्ग एससी एसटी या अन्य के कल्चर को छेड़ना नहीं चाहिए, समान नागरिक संहिता के माध्यम से हम संतुलन के साथ चलें और अधिक से अधिक रूप से यह लोगों तक पहुंचना चाहिए।- राकेश बाथम, कांग्रेस कार्यकर्ता
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बाल भवन सभागार के मंच पर बैठे प्रबुद्वजन व अन्य। नईदुनिया

यूसीसी लागू हो लेकिन चरणबद्व तरीके से इसे अमल में लाया जाना चाहिए, पहले विवाह फिर परिवार इस तरह आगे बढ़ना चाहिए। वैवाहिक संपत्ति पंजीकरण भी किया जाना चाहिए यह फायदेमंद होगा। इसी तरह बच्चों की कस्टडी को लेकर भी पंजीकरण होना चाहिए।- प्रतीक अग्रवाल, कारोबारी

जब संविधान बना तब कई चीजें शामिल की गईं, इसमें किसी की धार्मिक भावनाएं आहत न हों, यह प्रमुखता से रखा गया। यूसीसी को ग्रामीण क्षेत्रों तक प्रमुखता से पहुंचाया जाना चाहिए जिससे उन्हें सब पता चल सके।- हाजी रईस अहमद,अल्पसंख्यक सेल



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