सुहागिन महिलाएं व्रत के संकल्प के साथ सुबह वट वृक्ष की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर कलावा व कच्चा सूत लपेटकर पति की दीर्घायु के साथ परिवार की सुख- …और पढ़ें

HighLights
- जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और ग्वालियर के प्रमुख शनि मंदिरों में महायोग
- साढ़े साती और ढैया के प्रभाव से मुक्ति के लिए मंदिरों में विशेष अनुष्ठान
- शहर के प्राचीन शनि मंदिरों में की गई है विशेष सजावट
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। वट सावित्री अमावस्या के साथ भगवान शनिदेव का प्राकट्योत्सव पूर्ण श्रद्धाभाव और भक्तिभाव के साथ आज यानी शनिवार को 16 मई को मनाई जाएगी। सुहागिन महिलाएं व्रत के संकल्प के साथ सुबह वट वृक्ष की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर कलावा व कच्चा सूत लपेटकर पति की दीर्घायु के साथ परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी। जिन परिवारों में पुत्र के विवाह व संतानोप्ति पर दौहरा वर ढोल-तासों के साथ पूजा जाता है।
मंदिरों में विशेष सजावट
इसके साथ नगर के प्रमुख ट्रांसपोर्ट नगर के पास स्थित प्राचीन शनिदेव मंदिर, कटी घाटी, द्वारिकाधीश प्रागंण में विराजित नवग्रह, शिवाजी पार्क स्थित नवग्रह मंदिर, तारागंज स्थित शनिदेव मंदिर, दाल बाजार व थाटीपुर स्थित शनिदेव मंदिर पर विशेष सजावट की गई।
श्रद्धालु भगवान शनिदेव का सरसों के तेल से अभिषेक करने के साथ काला वस्त्र, छतरी, चूते-चप्पल, गरीबों व दिव्यांगों को भोजन सहित भगवान शनिदेव की प्रिय वस्तुओं का दान कर भगवान शनिदेव से शुभ फल की कामना करेंगे। जिन राशि के जातकों में साढ़े साती और ढैया का प्रभाव है, उनके लिए भगवान शनिदेव की पूजा-अर्चना वरदान साबित होंगी। इस अवसर पर मंदिरों में सुंदरकांड के पाठ भी होंगे।
ज्योतिषाचार्य पं. रवि शर्मा ने बताया कि वट सावित्री (बड़ अमावस्या), शनि ज्येष्ठ मास की अमावस्या को वट सावित्री व्रत किया जाता है। इस वर्ष वट सावित्री (बड़ अमावस्या) 16 मई को मनाई जाएगी इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु एवं उत्तम स्वास्थ्य हेतु बड़ (वट वृक्ष) की पूजा करती हैं।
