राजधानी भोपाल में एक सप्ताह पहले 7 मई को 500-500 रुपये के नकली नोटों के साथ पकड़े गए डॉ. सैफुल इस्लाम से पूछताछ में पुलिस को कई चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं। जांच में सामने आया है कि नकली नोटों का एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह सक्रिय है, जिसके तार पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश से जुड़े हुए हैं। पुलिस के अनुसार डॉ. सैफुल इस्लाम पश्चिम बंगाल का रहने वाला है और वह इस पूरे नेटवर्क का सिर्फ एक सदस्य है। नकली नोटों के इस गिरोह का असली मास्टरमाइंड पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और मालदा में नेटवर्क चलाने वाला शरीफ उल इस्लाम उर्फ शरीफ उल्ला बताया जा रहा है।
बर्खास्त बीएसएफ जवान का नाम भी आया सामने
जांच में यह भी सामने आया है कि शरीफ उल्ला का बड़ा भाई समीर उल इस्लाम सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ में कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में तैनात रह चुका है। पश्चिम बंगाल में तैनाती के दौरान उस पर बांग्लादेशी तस्करों की मदद करने, नकली भारतीय नोटों को सीमा पार भारत में पहुंचाने और तस्करों को सुविधाएं देने के आरोप लगे थे। इन्हीं आरोपों के चलते समीर उल इस्लाम को बीएसएफ से बर्खास्त कर दिया गया था। भोपाल के कोहेफिजा थाना पुलिस की पूछताछ में यह सनसनीखेज जानकारी सामने आई है।
पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े नेटवर्क की आशंका
पुलिस जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि भारतीय करंसी के नकली नोट पाकिस्तान से जुड़े तस्करों और कथित उन्मादी तत्वों द्वारा बांग्लादेश के रास्ते भारत में भेजे जा रहे थे। भोपाल पुलिस ने इस पूरे मामले की जानकारी पुलिस मुख्यालय को भेज दी है, ताकि इसे केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार के साथ साझा किया जा सके। पुलिस का मानना है कि इससे नकली नोटों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का बड़ा खुलासा हो सकता है।
भोपाल में नकली नोट खपाने भेजा गया था आरोपी
पूछताछ में डॉ. सैफुल इस्लाम ने बताया कि उसे शरीफ उल्ला नकली नोट देता था और भोपाल में इन्हें बाजार में चलाने के लिए भेजा गया था। उसने बताया कि शरीफ उल्ला बांग्लादेश के जरिए नकली नोट पश्चिम बंगाल में मंगवाता था और वहीं से अपना नेटवर्क संचालित करता था। डॉ. सैफुल पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले का रहने वाला है। उसने यह भी बताया कि शरीफ उल्ला का भाई समीर उल इस्लाम पूरे नेटवर्क को मदद पहुंचाता था।
बीएसएफ में नौकरी के दौरान लीक करता था जानकारी
पुलिस जांच में पता चला है कि समीर उल इस्लाम बीएसएफ में नौकरी के दौरान सीमा क्षेत्रों की निगरानी से जुड़ी जानकारियां गिरोह तक पहुंचाता था। इन्हीं सूचनाओं का इस्तेमाल कर बांग्लादेश के रास्ते नकली नोटों की खेप भारत लाई जाती थी। बताया गया कि समीर उल इस्लाम वर्ष 2018 में कर्नाटक के बेलगावी जिले में पदस्थ रहा था। वहीं पकड़े गए एक नकली नोट मामले में शरीफ उल्ला का नाम सामने आया था। बाद में जांच में दोनों भाइयों के संबंध उजागर हुए। इसके बाद वर्ष 2021 में पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने शरीफ उल्ला को नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने अपने भाई समीर उल इस्लाम की भूमिका का भी खुलासा किया था, जिसके बाद बीएसएफ ने समीर को सेवा से बर्खास्त कर दिया था।
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पश्चिम बंगाल गई भोपाल पुलिस टीम
कोहेफिजा थाना प्रभारी कृष्ण गोपाल शुक्ला ने बताया कि गिरोह के मास्टरमाइंड शरीफ उल्ला की गिरफ्तारी के लिए भोपाल पुलिस की एक टीम पश्चिम बंगाल भेजी गई थी। हालांकि वह अपने ठिकाने से फरार मिला, लेकिन पुलिस को उसके नेटवर्क और गतिविधियों से जुड़ी अहम जानकारियां हाथ लगी हैं। उन्होंने बताया कि शरीफ उल्ला लंबे समय से नकली नोटों का गिरोह चला रहा था और इस नेटवर्क में कई अन्य लोग भी शामिल हैं। पुलिस अब गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।
