जबलपुर से मंडला होते हुए चिल्पी तक राष्ट्रीय राजमार्ग-30 (NH-30) को फोरलेन बनाने की बड़ी परियोजना पर काम शुरू हो गया है। लगभग 160 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के लिए डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार की जा रही है। यह परियोजना मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ व्यापार, पर्यटन और यातायात व्यवस्था को नई गति देगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एचएचएआई) के अनुसार यह कॉरिडोर प्रयागराज–जबलपुर–रायपुर मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्तमान में यह सड़क टू-लेन है, लेकिन लगातार बढ़ते ट्रैफिक, भारी मालवाहक वाहनों और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसे आधुनिक फोरलेन कॉरिडोर में विकसित किया जा रहा है। परियोजना की डीपीआर मार्च 2027 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
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यात्रियों को जाम और लंबी यात्रा से मिलेगी राहत
फिलहाल जबलपुर से रायपुर तक का यह मार्ग भारी यातायात दबाव झेल रहा है। संकरी सड़क और ओवरटेकिंग की कम जगह के कारण कई हिस्सों में जाम और दुर्घटनाओं की स्थिति बनती है। खासकर नाग घाट, भवाल घाट और चिल्पी घाट जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में तीखे मोड़ और भारी वाहनों की आवाजाही यात्रियों के लिए चुनौती बनती है। फोरलेन बनने के बाद सड़क की क्षमता बढ़ेगी, यात्रा समय कम होगा और लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक हो सकेगी। सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ब्लैकस्पॉट्स को स्थायी रूप से सुधारने की योजना भी बनाई गई है।
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घाट क्षेत्रों में होंगे आधुनिक इंजीनियरिंग कार्य
परियोजना के तहत घाट सेक्शनों में आधुनिक तकनीक से सड़क उन्नयन किया जाएगा। तीखे मोड़ों पर ज्योमेट्रिक सुधार, बेहतर विजिबिलिटी, आधुनिक रोड सेफ्टी बैरियर्स, रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड और वैज्ञानिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित किए जाएंगे। इससे बारिश के दौरान सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बेहतर होगी। बीजाडांडी और बिछिया जैसे व्यस्त क्षेत्रों में ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए बायपास, फ्लाईओवर और अंडरपास भी प्रस्तावित हैं। इससे स्थानीय और हाई-स्पीड ट्रैफिक को अलग किया जा सकेगा और जाम की स्थिति कम होगी।
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कान्हा टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण पर फोकस
यह मार्ग कान्हा टाइगर रिजर्व और संवेदनशील वन क्षेत्रों से होकर गुजरता है। ऐसे में परियोजना में वन्यजीव संरक्षण को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एनिमल अंडरपास और वाइल्डलाइफ क्रॉसिंग बनाए जाएंगे। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष चेतावनी संकेत और रोड सेफ्टी व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।
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व्यापार, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा लाभ
फोरलेन परियोजना से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच व्यापार और माल परिवहन तेज और आसान होगा। यह कॉरिडोर औद्योगिक क्षेत्रों, कृषि मंडियों और लॉजिस्टिक नेटवर्क को मजबूत करेगा। साथ ही जबलपुर के भेड़ाघाट, धुआंधार, मदन महल और कान्हा टाइगर रिजर्व जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन गतिविधियों में भी तेजी आएगी। इससे होटल, परिवहन और स्थानीय व्यवसायों को लाभ मिलेगा तथा रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना केवल सड़क चौड़ीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित, आधुनिक और पर्यावरण संतुलित परिवहन कॉरिडोर विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम है।
