डिवीजन बेंच ने आदेश में उल्लेख किया कि 22 अप्रैल 2025 को संबंधित मामले में रिट याचिका में जस्टिस जीएस अहलूवालिया द्वारा अंतरिम आदेश पारित किया गया था। …और पढ़ें

HighLights
- अंतरिम आदेश देने वाले जज बोले- सुनवाई ठीक नहीं।
- ग्वालियर की एक टाउनशिप में मंदिर निर्माण का विवाद।
- केस में पहले जस्टिस अहलूवालिया ने दिया था आदेश।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में बुधवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच में शामिल जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। कहा कि पूर्व में दिए गए अंतरिम आदेश को देखते हुए मामले की सुनवाई करना उचित नहीं होगा।
मामला रिट अपील अनिल कुमार सिंह चौहान बनाम प्रवीण शर्मा एवं अन्य से जुड़ा है जिसमें गुलमोहर सिटी टाउनशिप में मंदिर निर्माण के विवाद पर था, हाई कोर्ट ने उस मामले में सख्ती भी दिखाई थी। यह सुनवाई बुधवार को जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की डिवीजन बेंच में हो रही थी।
डिवीजन बेंच ने आदेश में उल्लेख किया कि 22 अप्रैल 2025 को संबंधित मामले में रिट याचिका में जस्टिस जीएस अहलूवालिया द्वारा अंतरिम आदेश पारित किया गया था।
बाद में पांच मई 2026 को पक्षकारों के अधिवक्ताओं ने वर्तमान डिवीजन बेंच पर विश्वास जताते हुए यह कहा था कि उन्हें इस बेंच द्वारा मामले की सुनवाई पर कोई आपत्ति नहीं है।
हालांकि बुधवार को सुनवाई के दौरान जब अदालत ने 22 अप्रैल 2025 के अंतरिम आदेश का सूक्ष्म परीक्षण किया तो डिवीजन बेंच ने माना कि चूंकि पहले विशेष प्रकार के निर्देश जारी किए जा चुके हैं, इसलिए निष्पक्षता की दृष्टि से जस्टिस जीएस अहलूवालिया का इस मामले की सुनवाई करना उचित नहीं होगा।
इसके बाद अदालत ने आदेश दिया कि मामला ऐसी अन्य डिवीजन बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जिसमें जस्टिस जीएस अहलूवालिया सदस्य न हों।
