ग्वालियर कोर्ट ने नाबालिग से सोशल मीडिया छेड़छाड़ मामले में आरोपी को तीन साल की सजा दी। डिजिटल साक्ष्य अहम रहे, जबकि आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप स …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 30 Apr 2026 12:06:18 PM (IST)Updated Date: Thu, 30 Apr 2026 12:06:18 PM (IST)

इंस्टाग्राम हैक कर नाबालिग को किया परेशान, पीछा और उत्पीड़न करने पर आरोपी को 3 साल की सजा
पॉक्सो अदालत ने आरोपी को दी सजा। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. आरोपी ने नाबालिग की सोशल मीडिया आईडी हैक कर परेशान किया
  2. कोर्ट ने डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराया आरोपी
  3. तीन साल की सजा और 1000 रुपये जुर्माना लगाया

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर की विशेष पॉक्सो अदालत ने सोशल मीडिया के जरिए नाबालिग लड़की का पीछा करने और लैंगिक उत्पीड़न के मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए सख्त सजा सुनाई है। अदालत ने डिजिटल साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी की संलिप्तता साबित मानी, जबकि आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप प्रमाणित नहीं होने पर उसे इस धारा से बरी कर दिया गया।

विशेष न्यायाधीश (पाक्सो) वंदना राज पाण्डेय की अदालत ने मनीष बाथम को नाबालिग लड़की के सोशल मीडिया अकाउंट से छेड़छाड़, पीछा करने और लैंगिक उत्पीड़न का दोषी पाया। अदालत ने आरोपी को तीन वर्ष के कठोर कारावास और 1000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। हालांकि, आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उसे बरी कर दिया गया।

आईडी हैक कर बदला नाम, किया परेशान

मामले में सामने आया कि आरोपी ने एक अन्य विधि विरुद्ध किशोर के साथ मिलकर पीड़िता के इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट का पासवर्ड हासिल कर लिया था। इसके बाद उसकी प्रोफाइल का नाम बदलकर “प्रिया मांझी” कर दिया गया और लगातार उसे सोशल मीडिया के जरिए परेशान किया गया।

डिजिटल जांच से जुड़े अहम सबूत

फॉरेंसिक विशेषज्ञ जितेन्द्र सिंह जादौन ने अदालत को बताया कि मोबाइल की जांच कर चैट डेटा को सीडी और पेनड्राइव में सुरक्षित किया गया। सेलेब्राइट टूल के माध्यम से डेटा निकाला गया। हालांकि आरोपी के मोबाइल से सीधे विवादित चैट नहीं मिली, लेकिन अन्य डिजिटल साक्ष्यों ने मामले को मजबूत किया।

आईपी एड्रेस और मोबाइल नंबर से जुड़ा आरोपी

जांच के दौरान पुलिस ने मेटा (फेसबुक-इंस्टाग्राम) से डेटा प्राप्त किया। इसमें सामने आया कि आरोपी के नाम से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से ही पीड़िता की सोशल मीडिया आईडी को उसकी मौत से ठीक पहले एक्सेस किया गया था।

परिवार के बयान बने अहम कड़ी

पीड़िता के पिता, माता और भाई ने अदालत में बयान दिया कि आरोपी लगातार उनकी बेटी को परेशान करता था और उसकी आईडी से छेड़छाड़ की थी। उन्होंने चैट के स्क्रीनशॉट भी पेश किए, जो मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुए।

अदालत का फैसला

अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया और तीन साल की सजा सुनाई। यह फैसला सोशल मीडिया के दुरुपयोग और साइबर उत्पीड़न के मामलों में एक अहम संदेश के रूप में देखा जा रहा है।



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