निर्देशों के अनुसार बी.फार्मा प्रथम सेमेस्टर (रेगुलर/एक्स/एटीकेटी) एवं द्वितीय, चतुर्थ और षष्ठम सेमेस्टर (केवल एटीकेटी) के परीक्षार्थियों के प्रायोगिक …और पढ़ें
_m.webp)
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय के फार्मेसी अध्ययनशाला द्वारा बी.फार्मा पाठ्यक्रम से जुड़े महाविद्यालयों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। निर्देशों के अनुसार बी.फार्मा प्रथम सेमेस्टर (रेगुलर/एक्स/एटीकेटी) एवं द्वितीय, चतुर्थ और षष्ठम सेमेस्टर (केवल एटीकेटी) के परीक्षार्थियों के प्रायोगिक परीक्षा के अंक 30 अप्रैल तक अनिवार्य रूप से एमपी ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित महाविद्यालय यह सुनिश्चित करें कि किसी भी छात्र के आंतरिक या प्रायोगिक अंक अपडेट होने से शेष न रह जाएं।
खाली कॉलम छोड़ने पर परिणाम होगा प्रभावित
पोर्टल पर अंक भरते समय प्रत्येक छात्र के अनुक्रमांक के सामने या तो प्राप्तांक दर्ज किया जाए या फिर अनुपस्थित अंकित किया जाए। किसी भी प्रकार का कॉलम खाली छोड़ना या गलत प्रविष्टि करना स्वीकार्य नहीं होगा। निर्देशों में यह भी कहा गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा तक अंक ऑनलाइन अपडेट नहीं किए जाते हैं, तो संबंधित छात्र को उस विषय में अनुपस्थित मानते हुए उसका परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में पूरी जिम्मेदारी छात्र एवं संबंधित महाविद्यालय प्राचार्य की होगी।
त्रुटि सुधार के लिए अर्थदंड का प्रावधान
विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी परिस्थिति में ऑफलाइन प्रायोगिक अंक स्वीकार नहीं किए जाएंगे। यदि किसी महाविद्यालय द्वारा अंक अपलोड करने में त्रुटि होती है, तो परीक्षा परिणाम घोषित होने से पहले मूल अभिलेखों के साथ प्रति छात्र 1000 रुपये का अर्थदंड जमा कर आवेदन प्रस्तुत करने पर ही संशोधन संभव होगा। परिणाम घोषित होने के बाद किसी भी प्रकार का संशोधन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सत्यापन और प्रतियों को जमा करने की प्रक्रिया
इसके अलावा, ऑनलाइन अंक भरने के बाद उसकी प्रिंट कॉपी निकालकर प्राचार्य से प्रमाणित कराना अनिवार्य है। प्रमाणित प्रति 4 मई तक विश्वविद्यालय के कक्ष क्रमांक 307 में जमा करानी होगी। निर्धारित समयसीमा का पालन न करने पर विश्वविद्यालय द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सभी महाविद्यालयों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि छात्रों के परीक्षा परिणाम में किसी प्रकार का विलंब न हो।
