ग्वालियर जेएएच में 16 बेड का नया कार्डियोलॉजी वार्ड उद्घाटन के बाद स्टाफ की कमी से बंद रहा, मरीजों को बेड न मिलने से परेशानी जारी। …और पढ़ें

HighLights
- उद्घाटन के बाद 16 बेड वाला वार्ड बंद मिला
- नर्सिंग स्टाफ की कमी से शुरू नहीं हो सका
- मरीजों को अब भी बेड के लिए भटकना पड़ रहा
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। गजराराजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) और जयारोग्य अस्पताल (जेएएच) एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में हैं।
अस्पताल में हृदय रोगियों के बढ़ते दबाव को देखते हुए 16 अतिरिक्त बेड के साथ नए वार्ड का बड़े स्तर पर उद्घाटन किया गया, लेकिन हकीकत यह है कि उद्घाटन के तुरंत बाद ही इस वार्ड पर ताला लग गया। इस स्थिति ने न केवल प्रबंधन की तैयारी पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों की परेशानियां भी बढ़ा दी हैं।
उद्घाटन के बाद ही बंद हुआ वार्ड
गुरुवार को पुराने मेडिसिन आईसीयू को कार्डियोलॉजी विभाग में मर्ज कर 16 अतिरिक्त बेड जोड़ने का दावा किया गया था। अधिष्ठाता डॉ. आरकेएस धाकड़ ने फीता काटकर इसका शुभारंभ भी किया, लेकिन जैसे ही कार्यक्रम खत्म हुआ, वार्ड को बंद कर दिया गया। नए वार्ड के गेट पर ताला लटकता मिला, जिससे मरीजों को कोई राहत नहीं मिल सकी।
नर्सिंग स्टाफ की कमी बनी बड़ी वजह
इस पूरे मामले की सबसे बड़ी कमी नर्सिंग स्टाफ की अनुपलब्धता सामने आई है। बिना पर्याप्त स्टाफ के किसी भी वार्ड का संचालन संभव नहीं होता, लेकिन प्रबंधन ने इस बुनियादी जरूरत को नजरअंदाज कर दिया। नतीजतन, तैयार वार्ड होने के बावजूद उसे मरीजों के लिए शुरू नहीं किया जा सका।
मरीजों की बढ़ती परेशानी
कार्डियोलॉजी विभाग में पहले से ही बेड की कमी बनी हुई है। ग्वालियर-चंबल अंचल के अलावा उत्तर प्रदेश और राजस्थान से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां पहुंचते हैं। ऐसे में कई बार मरीजों को जमीन पर लेटाकर प्राथमिक उपचार देना पड़ता है। नए वार्ड से राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन फिलहाल स्थिति जस की तस बनी हुई है।
दावों और हकीकत में अंतर
शुभारंभ के दौरान प्रबंधन ने दावा किया था कि बेड संख्या बढ़ने से मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा और प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी। लेकिन बिना स्टाफ के किया गया यह उद्घाटन केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। अब यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की जमीनी सच्चाई को उजागर कर रहा है, जहां घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन क्रियान्वयन अधूरा रह जाता है।
