ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर आधी रात को ही प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने सड़कों पर उतर गए। …और पढ़ें

HighLights
- आंधी-बारिश से 33 और 11 केवी फीडरों में बड़े फाल्ट से चरमराई व्यवस्था
- गर्मी और उमस के बीच शुक्रवार देर शाम तक परेशान रहे उपभोक्ता
- मेंटेनेंस के नाम पर हर हफ्ते होने वाली कटौती की खुली पोल
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। गुरुवार रात आए तेज अंधड़ और वर्षा ने शहर की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह से धराशायी कर दिया। आंधी के कारण दर्जनों स्थानों पर पेड़ और उनकी शाखाएं बिजली की लाइनों और खंभों पर आ गिरीं, जिससे पूरा सिस्टम लड़खड़ा गया। इसका खमियाजा शुक्रवार को दिनभर शहर की आधी से ज्यादा आबादी को भुगतना पड़ा।
मंत्री के निर्देश के बावजूद अंधेरा पसरा
गर्मी और उमस के बीच शुक्रवार शाम और देर रात तक कई इलाकों के उपभोक्ता पानी और बिजली के लिए तरसते रहे। बिजली संकट की गंभीरता को देखते हुए खुद ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर गुरुवार की आधी रात को ही प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने सड़कों पर उतर गए।
उन्होंने उप नगर ग्वालियर के मां वैष्णोपुरम, चंदनपुरा, श्याम बाबा मंदिर, राठौर चौक और गदाईपुरा जैसे इलाकों का दौरा किया। ऊर्जा मंत्री ने बिजली कंपनी के अधिकारियों को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था कर बिजली आपूर्ति बहाल करने के कड़े निर्देश दिए थे। इसके बावजूद शुक्रवार देर रात तक कई इलाकों में अंधेरा पसरा रहा।
हफ्ते भर के मेंटेनेंस का क्या हुआ: बिजली कंपनी हर हफ्ते मेंटेनेंस (रखरखाव) के नाम पर चार से पांच घंटे की कटौती करती है। लेकिन मानसून पूर्व की पहली तेज आंधी ने ही कंपनी के दावों की पोल खोलकर रख दी।
इन बड़े फीडरों में फाल्ट ने बढ़ाई मुसीबत
- बिजली कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक, व्यवधान इतना बड़ा था कि मुख्य लाइनों को ही नुकसान पहुंचा।
- 33 केवी फीडर: गारमेंट पार्क, सेवानगर, एमइएस और मोनोपाल महलगांव फीडर पर बड़े फाल्ट होने के कारण मुख्य सप्लाई ठप रही।
- 11 केवी फीडर: प्रेमनगर, रेसकोर्स रोड और चमड़ा मिल फीडर पर भी पेड़ गिरने से तार टूट गए, जिन्हें सुधारने में घंटों समय लगा।
- क्षेत्रवार स्थिति: दोपहर से लेकर रात तक बेहाल रहे लोग
- महलगांव क्षेत्र: यहां दोपहर के वक्त जो बिजली गुल हुई, वह शुक्रवार रात आठ बजे तक भी बहाल नहीं हो सकी थी। लोग इनवर्टर डिस्चार्ज होने के बाद अंधेरे में रहने को मजबूर हुए।
- सिकंदर कंपू: इस क्षेत्र में दोपहर एक बजे कटी बिजली शाम चार बजे के बाद ही लौट सकी। करीब तीन से चार घंटे तक लोग उमस से परेशान रहे।
- नाका चंद्रवदनी: इस बड़े रिहायशी इलाके में भी दोपहर एक बजे गुल हुई बिजली शाम पांच बजे के बाद ही चालू हो पाई।
- हजीरा, कांचमिल, थाटीपुर और मुरार: इन क्षेत्रों में भी दिनभर ट्रिपिंग और अघोषित कटौती का सिलसिला चलता रहा। लो-वोल्टेज और बार-बार आती-जाती बिजली ने इलेक्ट्रानिक उपकरणों को भी नुकसान पहुंचाया।
