पहली बार अध्यक्ष पद से क्रिएटिव हाउस के पीछे हटने से ह्वाइट हाउस को लाभ होने के बजाय नुकसान की आशंका है। …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 20 Jun 2026 03:02:55 PM (IST)Updated Date: Sat, 20 Jun 2026 03:03:32 PM (IST)

चैंबर चुनाव: ह्वाइट हाउस की नई रणनीति, अध्यक्ष पद पर सीधे मुकाबले की जगह 'त्रिकोणीय जंग' की तैयारी

HighLights

  1. क्रिएटिव हाउस के पीछे हटने से बिगड़े समीकरण
  2. ह्वाइट हाउस को नुकसान का डर
  3. तीसरे दमदार उम्मीदवार की तलाश

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। अध्यक्ष पद पर ह्वाइट हाउस के उम्मीदवार पारस जैन का मुकाबला इसी हाउस के निवर्तमान अध्यक्ष डॉ. प्रवीण अग्रवाल से होने से हाउस अब नई चुनावी रणनीति पर मंथन कर रहा है। हाउस की कोशिश है कि यह मुकाबला आमने-सामने का न होकर त्रिकोणीय हो जाए। इसके लिए अध्यक्ष पद के लिए एक और उम्मीदवार उतारने के लिए व्यापारियों के बीच किसी चर्चित नाम की तलाश की जा रही है।

हालांकि क्रिएटिव हाउस अध्यक्ष पद को लेकर पहले ही अपने पत्ते खोल चुका है। हाउस ने घोषणा कर दी है कि वह अध्यक्ष पद पर कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगा। अध्यक्ष पद के लिए यदि कोई निर्दलीय उम्मीदवार नामांकन दाखिल करता है तो उसके समर्थन पर विचार किया जा सकता है। वह नाम डॉ. प्रवीण अग्रवाल का भी हो सकता है या फिर कोई अन्य। ह्वाइट हाउस की संभावनाएं इसी ‘अन्य’ उम्मीदवार पर टिकी हैं।

उम्मीदवारों का प्रचार पकड़ रहा तेजी: सभी उम्मीदवारों की घोषणा के बाद प्रचार प्रसार शुरू हो गया है। सभी उम्मीदवार न केवल बैठक ले रहे हैं और बल्कि वन टू वन मिल भी रहे है। इससे मतदाताओं पर उनका सकारात्मक प्रभाव पड़ सके।

अध्यक्ष पद से क्रिएटिव हाउस के पीछे हटने से नुकसान: चैंबर ऑफ कॉमर्स के अब तक के चुनावों में ह्वाइट हाउस और क्रिएटिव हाउस के बीच सीधा मुकाबला होता रहा है। पहली बार अध्यक्ष पद से क्रिएटिव हाउस के पीछे हटने से ह्वाइट हाउस को लाभ होने के बजाय नुकसान की आशंका है। चैंबर चुनाव की तैयारियों के बीच ही क्रिएटिव हाउस ने स्पष्ट कर दिया था कि उसके पास अध्यक्ष पद के लिए कोई दमदार उम्मीदवार नहीं है, क्योंकि हाउस से जुड़े विजय गोयल सहित अन्य लोग पहले ही चुनाव लड़ने से इन्कार कर चुके थे।

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अपना उम्मीदवार जिताने बना रहे रणनीति

ह्वाइट हाउस अब अध्यक्ष पद के लिए एक और निर्दलीय उम्मीदवार की तलाश कर रहा है, ताकि मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया जा सके और अपने उम्मीदवार को जिता सकें। इसके लिए वैश्य समाज के किसी प्रभावशाली व्यक्ति की तलाश की जा रही है। जिसकी रिश्तेदारी व भावनात्मक संबंधों से वोटों में सेंध लगाई जा सके। फिलहाल ऐसा कोई तीसरा नाम सामने नहीं आ रहा है, क्योंकि अध्यक्ष पद के इच्छुक कई लोग पहले ही इन समीकरणों के बीच चुनाव लड़ने से इन्कार कर चुके हैं। ह्वाइट हाउस में आंतरिक विरोध के कारण इसके प्रमुख रणनीतिकार और पूर्व अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है।



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