मध्यप्रदेश में मंगलवार से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया। प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में बच्चों की चहल-पहल लौट आई है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था की एक बड़ी विडंबना भी उसी दिन सामने आ गई। एक ओर हजारों स्कूल शिक्षक संकट से जूझ रहे हैं, तो दूसरी ओर चयनित शिक्षक अभ्यर्थी नियुक्ति पत्र की मांग को लेकर राजधानी भोपाल में लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में वर्ग-2 के चयनित अभ्यर्थी मौजूद हैं। कई महिला अभ्यर्थी अपने छोटे बच्चों को साथ लेकर आंदोलन में शामिल हुई हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि दस्तावेज सत्यापन और चॉइस फिलिंग जैसी सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए जा रहे हैं।


चार साल बाद भी नहीं मिली नौकरी

शिक्षक वर्ग-2 भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी। इसके बाद पात्रता परीक्षा, चयन परीक्षा और परिणाम की प्रक्रिया पूरी हुई। सितंबर 2025 में परिणाम घोषित होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को उम्मीद थी कि जल्द ही नियुक्ति मिल जाएगी, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी नियुक्ति पत्र जारी नहीं हुए। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया के हर चरण को पूरा करने के बावजूद वे अब तक नौकरी के इंतजार में हैं। कई बार भोपाल आकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।

नियम तीन महीने का, इंतजार कई महीनों का

चयनित अभ्यर्थियों का दावा है कि भर्ती नियमों के अनुसार चयन सूची जारी होने के बाद निर्धारित समय सीमा में नियुक्ति आदेश जारी किए जाने चाहिए। इसके बावजूद प्रक्रिया लगातार लंबित है। उनका सवाल है कि जब चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और विद्यालयों का आवंटन भी लगभग तय हो चुका है, तो नियुक्ति में देरी क्यों हो रही है?

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स्कूलों में शिक्षक नहीं, फिर भी नियुक्तियां अटकी

शिक्षा विभाग की स्थिति पहले से ही चिंताजनक बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 1,895 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। वहीं 29,116 स्कूलों में करीब 99,682 शिक्षकों की कमी बताई गई है। ग्रामीण इलाकों में हालात और ज्यादा गंभीर हैं, जहां कई स्कूल एक या दो शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। ऐसे में चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि जब स्कूलों में शिक्षकों की भारी जरूरत है, तब नियुक्ति प्रक्रिया को लंबित रखना समझ से परे है।

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बच्चे स्कूल में, शिक्षक धरने पर

धरने पर बैठे अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि नए शिक्षा सत्र से पहले नियुक्ति मिल जाएगी और वे स्कूलों में पढ़ाने पहुंच जाएंगे। लेकिन हालात ऐसे बन गए हैं कि जिस दिन बच्चे नई कक्षाओं में पहुंचे हैं, उसी दिन चयनित शिक्षक नौकरी की मांग को लेकर सड़क पर बैठने को मजबूर हैं। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि अपनी वैधानिक नियुक्ति की मांग को लेकर है। उनका कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत से दो-दो परीक्षाएं पास कर चयन हासिल किया है और अब केवल नियुक्ति आदेश चाहते हैं।



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