नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। 2020 के कोरोना काल में चुनावी सभाओं के दौरान कोविड प्रोटोकॉल तोड़ने पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ दर्ज मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। पुलिस ने लापरवाही का उदाहरण पेश करते हुए शिकायतकर्ता को ही नोटिस भेज कर उस एफआइआर की प्रति मांग ली जो उनके ही थाने में दर्ज है। जब ऐसा करने के पीछे का कारण उनसे पूछा गया तो police अधिकारी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।
दरअसल, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के ग्वालियर खंडपीठ ने नरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया था, जिसके बाद ग्वालियर के पड़ाव थाने में मामला दर्ज हुआ था। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले के शिकायतकर्ता अधिवक्ता आशीष प्रताप सिंह के पास जो जानकारी और सबूत हैं उन्हें पुलिस अपनी सुपुर्दगी में ले ले। पांच साल बाद भी यह केस फंसा हुआ है।
पांच साल से फंसा मामला; शिकायतकर्ता का पुलिस पर आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसने खुद पुलिस को कई बार वांछित जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध करवाना चाहे लेकिन पुलिस ने बहानेबाजी कर हर बार टाल दिया और अंत में अब भी दस्तावेज लेने के स्थान पर शिकायतकर्ता के ऑफिस से चोरी हुए मोबाइल के मामले की एफआइआर मांग रही है। बता दें कि यह एफआइआर भी पड़ाव थाने में ही दर्ज है।
फोन में थी रैली की रिकॉर्डिंग
पड़ाव थाने में शिकायतकर्ता द्वारा जिस फोन चोरी की एफआइआर दर्ज करवाई गई है उसमें नरेंद्र सिंह की रैली से जुड़े वीडियो फोटो मौजूद थे। शिकायतकर्ता आशीष प्रताप सिंह ने बताया उस फोन में इस मामले से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य मौजूद थे। वह फोन उनके ऑफिस से चोरी हो गया था जिसकी सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस को उपलब्ध करवाए गए हैं। लेकिन पुलिस ने उसमें भी कोई कार्रवाई नहीं की।
ऐसे समझें एफआइआर का खेल
शिकायतकर्ता ने बताया कि इस मामले में कई दिग्गज नेताओं के खिलाफ शिकायत की गई थी लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने भाजपा नेता मुन्नालाल गोयल के खिलाफ अपराध क्रमांक 430/2020 दर्ज किया । जब कोर्ट में यह बात सामने आई कि पुलिस ने तथ्य छिपाकर एफआइआर की है तो कोर्ट की सख्ती के बाद पड़ाव थाना पुलिस ने नरेंद्र सिंह के खिलाफ अपराध क्रमांक 438/2020 दर्ज किया। एक ही मामले की दो एफआइआर और दो जांच अधिकारी तय किए गए और फिर भी पांच साल से मामला लंबित ही है।
पुलिस ने पेश की खात्मा रिपोर्ट; कोर्ट ने फिर दिए जांच के आदेश
इस मामले में पुलिस ने माननियों को बचाने के लिए एक खात्मा रिपोर्ट पेश की और कहा कि उक्त मामले में जांच के बाद पुलिस को कोई ऐसा तथ्य नहीं मिला है। वहीं जब कोर्ट ने शिकायतकर्ता को तलब किया तो उन्होंने कोर्ट के समक्ष सभी तथ्य और साक्ष्य रखे। कोर्ट ने स्थिति को देख कर पुलिस को मामले की जांच करने और शिकायतकर्ता से साक्ष्य एकत्रित करने के आदेश दिए।
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पड़ाव थाना पुलिस से पत्र प्राप्त हुआ है। मैंने उन्हें बताया है कि किस अपराध क्रमांक में एफआइआर दर्ज है, मैं पुलिस को पूरी जानकारी दे चुका हूं। अब एफआइआर का रिकॉर्ड तो थाने के पास होना चाहिए। – आशीष प्रताप सिंह, शिकायतकर्ता
इस मामले में किस जांच अधिकारी ने किस कारण से पत्र भेजा है इसके बारे में अभी कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा सकता। जानकारी लेने के बाद ही स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। – संतोष भदौरिया, थाना प्रभारी पड़ाव
