त्विषा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। सीबीआई ने मुख्य आरोपी और मृतका के पति समर्थ सिंह को फरारी के दौरान शरण देने तथा अन्य प्रकार की सहायता पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ घेराबंदी शुरू कर दी है।
घटना के बाद समर्थ को भोजन, मोबाइल फोन उपलब्ध कराने और उसे छिपाने में मदद करने वाले करीबियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। अब तक ऐसे तीन मददगारों की पहचान की जा चुकी है। जांच में सामने आया है कि वारदात के बाद आरोपी समर्थ सिंह भोपाल और सीहोर के रास्ते पन्ना तथा वहां से जबलपुर पहुंचा था।
सीबीआई को इस पूरे रूट पर सीहोर और जबलपुर के कुछ संदिग्धों के नाम मिले हैं। इन सभी को समन जारी कर पूछताछ के लिए मुख्यालय बुलाया जा रहा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फरारी के दौरान समर्थ ने अपने इन मददगारों के साथ कौन-कौन सी जानकारियां साझा की थीं।
डिजिटल साक्ष्यों और बैंक खातों की बारीकी से जांच
मामले की तह तक पहुंचने के लिए सीबीआई की विशेष टीमें डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं। दहेज प्रताड़ना से जुड़े इस मामले में दोनों पक्षों के बैंक खातों और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है। इसके अलावा घटनास्थल और संभावित रूटों के सीसीटीवी फुटेज तथा व्हाट्सएप चैट का विश्लेषण कर विभिन्न कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी सीबीआई की नजर
सीबीआई ने आरोपियों के रिमांड के दौरान दिए गए बयानों का मिलान भोपाल पुलिस को दिए गए बयानों से कर लिया है। फिलहाल घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज, घटना की रात के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और मोबाइल लोकेशन के सत्यापन का काम जारी है।
सीबीआई अब त्विषा और समर्थ की दिसंबर 2025 में हुई शादी से लेकर 12 मई 2026 तक की व्हाट्सएप चैट, मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। माना जा रहा है कि इन रिपोर्टों से प्रताड़ना से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मिल सकते हैं, जिससे मामले की जांच को निर्णायक दिशा मिलेगी।
इस बीच जेल में बंद आरोपियों को कथित रूप से मिल रही वीआईपी सुविधाओं को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। जेल सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को गिरिबाला सिंह की इच्छा पर उन्हें ब्लैक कॉफी उपलब्ध कराई गई, जबकि समर्थ सिंह के पैर में मोच होने का हवाला देकर उसे क्रेप बैंडेज उपलब्ध कराया गया। जेल प्रबंधन की इन गतिविधियों के सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
