यह पौधा कम उपजाऊ जमीन पर उगाया जा सकता है और इसकी अधिक पानी की आवश्यकता होती है। हालांकि, डेढ़ साल बाद जब इसका फल आता है, तो यह बाजार में काफी महंगे दाम पर बिकता है। इसके अलावा, ड्रैगन फ्रूट के पौधे को बार-बार लगाने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि एक पौधा लगभग 20 साल तक फल देता है। इस प्रकार, यह फसल किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।

जिले में एक किसान ने शुरू की ड्रैगन फ्रूट की खेती

वर्तमान में मुगलपुरा गांव के सिद्धार्थ घुरैया ने ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है। हालांकि, सिद्धार्थ अभी तक पहली फसल नहीं ले पाए हैं, लेकिन आगामी जुलाई में उनकी पहली फसल आने की संभावना है। प्रारंभ में, सिद्धार्थ को इस खेती में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। उनके प्रयासों को देखकर कृषि विभाग अब जिले के लगभग 20 किसानों से यह खेती करवाने का निर्णय लिया है। यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो अन्य किसानों को भी इस फसल के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

इस तरह करेगा विभाग किसानों का चयन

ड्रैगन फ्रूट के पौधे को कम पानी की आवश्यकता होती है और इसे अधिक उपजाऊ जमीन की आवश्यकता नहीं होती। केवल यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि जलभराव की स्थिति न बने और तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक रहे। इसलिए विभाग ऐसे किसानों का चयन करेगा जिनके पास कम उपजाऊ जमीन है, ताकि ऐसी जमीन का सदुपयोग हो सके और किसानों को लाभ मिल सके।

एक किसान ने शुरू की ड्रैगन फ्रूट की खेती

जिले में एक किसान ने ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है। चूंकि इसमें एक बार लागत लगने के बाद करीब 20 वर्षों तक उत्पादन मिलता है और अधिक पानी या उपजाऊ जमीन की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए जिले में करीब 20 किसानों का चयन कर ड्रैगन फ्रूट की खेती कराई जाएगी। यदि प्रयोग सफल हुआ, तो अन्य किसानों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। मलखान सिंह गेहलोत, बीटीएम, कृषि विभाग आत्मा परियोजना।

ड्रैगन फ्रूट की विशेषताएं

कम उपजाऊ भूमि: यह फल कम उपजाऊ, पथरीली या अर्ध-बंजर जमीन पर भी आसानी से उगाया जा सकता है। कृषि विभाग इसी प्रकार की जमीनों पर इसके प्रयोग को बढ़ावा देगा।

मिट्टी का प्रकार: बलुई दोमट मिट्टी जिसमें पानी की निकासी अच्छी हो, इसके लिए सबसे उपयुक्त है। मिट्टी का पीएच मान 5.5 से 7 के बीच होना चाहिए।

जड़ों की बनावट: इसकी जड़ें जमीन में गहराई तक नहीं जाती हैं, इसलिए यदि जमीन के नीचे कुछ फीट पर सख्त मिट्टी या चट्टान भी हो, तो भी इसकी खेती पर कोई असर नहीं पड़ता।

पहला फल: कटी हुई कलम से पौधा लगाने पर, रोपण के 12 से 15 महीने बाद इसमें फूल और फल आने लगते हैं।

सीजन: भारत में ड्रैगन फ्रूट का फल आमतौर पर जून-जुलाई से नवंबर-दिसंबर तक आता है। इस दौरान पौधे पर कई चक्रों में फल आते हैं।

कमर्शियल उत्पादन: पौधा लगाने के तीसरे वर्ष से यह अपनी पूरी क्षमता के साथ फल देना शुरू करता है।

लंबी उम्र: एक बार लगाया गया ड्रैगन फ्रूट का पौधा 20 से 25 वर्षों तक लगातार फल देता रहता है।



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