वरुण शर्मा, नईदुनिया, ग्वालियर। राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) को अब भोपाल शिफ्ट कर दिया गया है। इस पूरी व्यवस्था के साथ स्टाफ की भी बदली हो गई है। अब अंतरराज्यीय बसों के परमिटों का पूरा काम भोपाल से ही होगा। फरवरी 2026 के नोटिफिकेशन के आधार पर इस व्यवस्था का पुनर्गठन किया गया और पूरा रिकार्ड व फाइलों को भोपाल मंगवा लिया गया है। ग्वालियर परिवहन मुख्यालय में एसटीए का काम देखने वाले स्टाफ का भी भोपाल तबादला कर दिया गया है।
अफसर भी असमंजस में
लेकिन तबादले के बाद से ही दोनों कर्मचारियों ने फिलहाल ज्वाइन नहीं किया है, यही कारण है कि फिलहाल काम सक्रिय रूप से शुरू नहीं हुआ है। वर्तमान में परिवहन विभाग के अफसर भी असमंजस में हैं। खास बात यह कि भी जिन दो कर्मचारियों का आदेश हुआ है उनमें एक का आदेश पहले भी भोपाल के लिए हो चुका है लेकिन तब भी ज्वाइनिंग नहीं हुई थी। एसटीए की बदली व्यवस्था का असर बस आपरेटरों पर भी पड़ेगा क्योंकि अब भोपाल के चक्कर लगाने होंगे।
ऐसे व्यवस्था बदली गई
नौ फरवरी: परिवहन मंत्रालय से नोटिफिकेशन जारी हुआ, जिसमें एसटीए के अध्यक्ष मप्र शासन द्वारा अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव स्तर का अधिकारी होगा। सदस्य के रूप में परिवहन आयुक्त होंगे। प्राधिकरण के सचिव के रूप में उप सचिव या अवर सचिव होंगे। पहले अध्यक्ष परिवहन के पीएस व दो सदस्य आयुक्त व पीडब्ल्यूडी सीई थे। सचिव का भी पद था जिसमें अध्यक्ष की ओर से पावर डेलीगेट थे।
26 मार्च: जीएडी से उप सचिव मप्र केसी नागर का आदेश जारी हुआ जिसमें जेल विभाग के साथ साथ परिवहन विभाग का सचिव बनाया गया।
दो अप्रैल: जीएडी से आदेश जारी हुए जिसमें अपर मुख्य सचिव मप्र गृह विभाग को आगामी आदेश तक परिवहन विभाग के अधीन राज्य परिवहन प्राधिकरण मप्र का अध्यक्ष नामांकित किया गया।
21 अप्रैल: परिवहन विभाग ने उप सचिव परिवहन केसी नागर को सचिव राज्य परिवहन प्राधिकरण का प्रभार सौंपा।
21 अप्रैल: उप सचिव परिवहन ने परिवहन मुख्यालय में पदस्थ एसटीए का काम देख रहे अविनाश बाथम सहायक वर्ग तीन व किशन शर्मा सहायक वर्ग तीन को परिवहन मंत्रालय में कार्य करने के निर्देश जारी कर आदेश दिया।
बाबू इतना भारी: आयुक्त-उप सचिव के आदेश तब भी ज्वाइन नहीं
स्थापना के बाबू अविनाश बाथम का 17 अप्रैल को परिवहन आयुक्त उमेश जोगा ने मंत्रालय के लिए तबादला किया था, इसके बाद अब उप सचिव नागर ने आदेश जारी किए। दोनों आदेशों के बाद भी अविनाश ने ज्वाइनिंग नहीं दी। किशन शर्मा रोडवेज का कर्मचारी है जो परिवहन में छह माह के एक्सटेंशन पर है।
निजी कर्मचारी संभालते है काम
बताया जाता है कि मुख्यालय में एसटीए के काम में अविनाश का सहयोग निजी कर्मचारी बंटी बाथम, हरी थापा व कपिल बाथम करते हैं, परमिटों की पूरी बागडोर इनके पास ही रहती थी। चर्चा यह भी है कि एसटीए के स्टाफ की शिकायतों के चलते इस व्यवस्था को भोपाल भेजा गया है। पहले अजय भटनागर स्टेनो थे, रिटायर हो गए और फिर मनीष सलूजा जिनका ग्वालियर से पूर्व में मंत्रालय तबादला कर दिया गया है।
परमिटों को लेकर शिकायतें भी, यह बड़ा सिंडिकेट जैसा
अंतरराज्यीय परमिटों को लेकर शिकायतें भी हैं, एसटीए के बाबुओं के खिलाफ आपरेटर वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायतें कर चुके हैं, आपरेटरों के अनुसार परमिटों के रेट तक सामने रखे जाते हैं, ऐसे ही परमिट जारी नहीं हो जाता है। एसटीए की व्यवस्थाओं को लेकर पूर्व में हाई कोर्ट भी नाराजगी जता चुका है।
