पुलिस व्यवस्था को स्मार्ट और पारदर्शी बनाने की दिशा में ग्वालियर पुलिस ने एक अभिनव पहल की है। थाना पड़ाव में ग्वालियर रेंज का पहला ‘ई-मालखाना’ और ‘पहर …और पढ़ें

Publish Date: Tue, 14 Apr 2026 07:54:15 PM (IST)Updated Date: Tue, 14 Apr 2026 07:54:15 PM (IST)

ग्वालियर पुलिस का डिजिटल धमाका... पड़ाव थाने में शुरू हुआ 'ई-मालखाना', QR कोड से ट्रैक होगा जब्त सामान
ग्वालियर में शुरू हुआ पहला ‘ई-मालखाना’ और ‘पहरा प्लेटफॉर्म’

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। पुलिस व्यवस्था को स्मार्ट और पारदर्शी बनाने की दिशा में ग्वालियर पुलिस ने एक अभिनव पहल की है। थाना पड़ाव में ग्वालियर रेंज का पहला ‘ई-मालखाना’ और ‘पहरा प्लेटफार्म’ शुरू किया गया है, जो पुलिसिंग के पारंपरिक ढर्रे को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है। इस अत्याधुनिक व्यवस्था का शुभारंभ अरविंद कुमार सक्सेना, पुलिस महानिरीक्षक ग्वालियर जोन ने किया। इस मौके पर धर्मवीर सिंह (एसएसपी), अनु बेनीवाल (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

क्यूआर कोड से साक्ष्यों की पहचान और डिजिटल रिकॉर्ड

नई व्यवस्था के तहत अब थाने के मालखाने में रखे जाने वाले जब्त सामान और केस से जुड़े साक्ष्यों का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा। हर वस्तु को क्यूआर कोड से टैग किया गया है, जिससे एक क्लिक पर उसकी पूरी जानकारी जैसे केस नंबर, विवरण, लोकेशन और फोटो तुरंत उपलब्ध हो सकेगी। इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि रिकॉर्ड में पारदर्शिता और सटीकता भी बढ़ेगी। अब आम जन के लिए थाने से जब्त प्रॉपर्टी पाना काफी आसान रहेगा। साथ ही वरिष्ठ अधिकारी के लिए मालखाने को मॉनिटर करना इससे आसान हो जाएगा और मालखाने मुंशी के लिए थाने में पारदर्शिता बनाए रखने में आसानी होगी।

‘पहरा प्लेटफार्म’ से सुरक्षित रहेगी साक्ष्यों की ‘चेन ऑफ कस्टडी’

‘पहरा प्लेटफार्म’ इस सिस्टम का सबसे खास हिस्सा है। यह वेब-बेस्ड प्लेटफार्म साक्ष्यों की ‘चेन ऑफ कस्टडी’ को पूरी तरह सुरक्षित करता है यानी कोई भी सामान कब, किसके पास और किस उद्देश्य से गया, इसकी हर जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज रहेगी। इससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता और न्यायिक प्रक्रिया दोनों मजबूत होंगी। इस पहल की एक और खास बात यह है कि इसे लगभग शून्य लागत में विकसित किया गया है। प्लेटफार्म को तकनीकी रूप से स्वयं पुलिस टीम द्वारा तैयार किया गया, जिसमें विशेष भूमिका अनु बेनीवाल की रही। यह सिस्टम हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में काम करता है, जिससे उपयोग में भी आसानी होगी।

समय की बचत और भविष्य की पुलिसिंग का रोडमैप

एसएसपी धर्मवीर सिंह ने कहा कि पारंपरिक मालखानों में किसी केस की फाइल या जब्त सामग्री ढूंढने में काफी समय लगता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया बेहद आसान और तेज हो जाएगी। वहीं आईजी अरविंद कुमार सक्सेना ने इसे भविष्य की पुलिसिंग का अहम कदम बताते हुए इसे अन्य जिलों में भी लागू करने की बात कही। डिजिटलीकरण के साथ सीसीटीवी से निगरानी भी की जाएगी। थाना पड़ाव के इस ई-मालखाने में 1993 तक की पुरानी जब्तियों का भी डिजिटलीकरण किया गया है और पूरे परिसर को सीसीटीवी निगरानी में रखा गया है। यह पहल न सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाएगी, बल्कि आम जनता का भरोसा भी और मजबूत करेगी।

मालखाना और पहरा प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली को समझें

  • इस प्लेटफॉर्म पर विवेचक अपनी यूनिक आईडी और पासवर्ड से लॉगिन कर सकते हैं।
  • प्लेटफार्म पर ‘एड प्रॉपर्टी’ द्वारा माल के सभी डिटेल जैसे अपराध क्रमांक, धारा, डिस्क्रिप्शन, लोकेशन, फोटो इत्यादि अपलोड करने पर यह स्वतः यूनिक क्यूआर कोड जनरेट करता है।
  • प्रिंटेड क्यूआर कोड को माल पर चिपकाकर उसको निर्धारित लोकेशन पर रख दिया जाता है।
  • माल की चेन ऑफ कस्टडी मेंटेन करने के लिए माल जब भी मालखाने से बाहर जाता है तो लेकर जाने वाले कर्मचारी का नाम एवं अधिकृत फॉर्म/ कोर्ट ऑर्डर अपलोड करना होता है।
  • डैशबोर्ड से सभी प्रॉपर्टी एवं उनका स्टेटस (कोर्ट, एफएसएल या निराकृत) दिखाई देता है।
  • मालखाने के बाहर एक सीसीटीवी कैमरे से माल की मूवमेंट पर नजर रखी जाती है।

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