नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। विश्व आज संग्रहालय दिवस मना रहा है। इस वर्ष ऐतिहासिक नगरी ग्वालियर भी इस उत्सव को नई ऊर्जा, नई चमक और नई तकनीक के साथ मना रही है। ग्वालियर के डिजिटल म्यूजियम, अटल म्यूजियम, इंडस्ट्रियल म्यूजियम और जियो साइंस म्यूजियम में एआइ की आधुनिक तकनीक ने पुरातन विरासत को एक अनोखा और जीवंत कलेवर दे दिया है। वो प्राचीन मूर्तियां, दुर्लभ कलाकृतियां, ऐतिहासिक अवशेष और औद्योगिक धरोहर कभी सिर्फ शीशों के पीछे सजकर रह जाती थीं, आज एआइ की जादुई छड़ी से जीवंत हो उठी हैं।

अब दीवारें बोल रही हैं, कलाकृतियां कहानियां सुना रही हैं और इतिहास के धूल भरे पन्ने डिजिटल स्क्रीन्स पर थ्रीडी एनिमेशन, वर्चुअल रियलिटी और इंटरएक्टिव अनुभव के रूप में नई पीढ़ी के सामने जीवंत होकर खड़े हैं। समय की यात्रा अब सिर्फ कल्पना नहीं रही, यह एक इंटरएक्टिव, रोमांचक और यादगार अनुभव बन गया है।

जहां एक तरफ हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत अपनी पूरी गरिमा के साथ मौजूद है, वहीं दूसरी तरफ आधुनिक तकनीक ने उसे नई पीढ़ी के लिए आकर्षक, समझने योग्य और प्रासंगिक बना दिया है। इस विशेष अवसर पर आइये हम सब मिलकर इन डिजिटल म्यूजियम्स की सैर करें, अपने अतीत से जुड़ें और भविष्य की ओर प्रेरित हों। क्योंकि संग्रहालय सिर्फ पुरानी चीजों का संग्रह नहीं रहे, वे हमारे इतिहास की जीवंत आत्मा हैं, जो आज एआइ की मदद से और भी ज्यादा जीवंत हो गए हैं।

वास्तुकला कक्ष में कई काल खंडों में दिखती हैं इमारतें: ग्वालियर की वास्तुकला कक्ष में छायाचित्रों द्वारा ऐतिहासिक इमारतों को दिखाया गया है। ये इमारतें अलग-अलग काल खंडों में बनाई गईं और इनकी स्थापत्य शैली भी भिन्न है। इसी तरह संगीत व नाट्य कला कक्ष में ग्वालियर का संगीत से संबंध दर्शाया गया है। संगीत के प्रकार व स्वर, ठाट, सरगम आदि को डिजिटल माध्यम से साझा किया जा रहा है।

चित्रकला कक्ष में दीवार पर दिखती है चितेरा कला: ग्वालियर की प्रसिद्ध चितेरा कला को चित्रकला कक्ष में दीवार पर बखूबी दर्शाया गया है। यह मुगल, राजपूत, पहाडगढ़, बाघ पेंटिंग के माध्यम से ग्वालियर चम्बल संभाग में प्रचलित कलाओं से अवगत कराती हैं।

पर्यटक तारामंडल से कर रहे आकाशगंगा की सैर: इसके साथ ही इसी परिसर में तारामंडल के माध्यम से पर्यटक आकाशगंगा की सैर कर रहे हैं। तारामंडल के माध्यम से शहरवासी खगोलीय घटनाक्रम को डिजिटल फार्म में देखने के साथ-साथ उनके बारे में विस्तृत जानकारी भी ले रहे हैं। इस तारामंडल में मुख्य भाग के साथ विभिन्न गैलरिया भी बनाई है, जिनके द्वारा अंतरिक्ष के बारे में जानकारी मिल रही है।

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अटल म्यूजियम: चित्रों के जरिये अटल जी के जीवन की यादों को संजोया गया

पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न स्व अटल बिहारी वाजपेयी की यादों को संजोने के लिए गोरखी स्कूल परिसर में अटल म्यूजियम पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस म्यूजियम में अटलजी के जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती गैलरियां शामिल की गई हैं। इनमें फोटो गैलरी, काव्य गैलरी, साइंस गैलरी, डार्क रूम गैलरी सहित विभिन्न गैलरियों के माध्यम से अटलजी के जीवन के विभिन्न पहलुओं को सुंदर तरीके से दर्शाया गया है। अटलजी की यादों को समर्पित इस अटल म्यूजियम में साइंस गैलरी के माध्यम से जहां अटलजी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान भारत के तकनीकि और विज्ञान में सफलता की कहानी को डायरोमा माडल आदि के द्वारा प्रदर्शित किया गया है।

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जियो साइंस म्यूजियम: महसूस कर सकेंगे भूकंप के झटके

देश के पहला भूविज्ञान संग्रहालय बाड़ा स्थित विक्टोरिया बिल्डिंग में बनाया गया है। यह म्यूजियम दो गैलरियों में विभाजित है, जिनमें पृथ्वी की उत्पत्ति, भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं तथा आदिम जीवन से मानव विकास तक की यात्रा को आकर्षक एवं शैक्षणिक रूप में प्रदर्शित किया गया है। इन दोनों गैलरी में विषय के आधार पर कुल 14 विशेष सेक्शन बनाए गए हैं। पहली गैलरी में डिजिटल डिस्प्ले और माडल्स के ज़रिए समझाया गया है कि सौरमंडल और पृथ्वी का जन्म कैसे हुआ। यहां लाइव सिमुलेशन और माडल्स हैं, जहां आप ज्वालामुखी विस्फोट की प्रक्रिया और भूकंप के झटके महसूस कर सकते हैं। अंतरिक्ष से पृथ्वी पर गिरे असली उल्कापिंडों के अवशेष और दुर्लभ पत्थरों को यहां प्रदर्शित किया गया है। भारत के अंटार्कटिका अभियानों से लाए गए विशेष पत्थर और हिमालय की चोटियों से एकत्रित दुर्लभ चट्टानें इस सेक्शन की बड़ी खासियत हैं। देश-विदेश से जुटाए गए बेशकीमती प्राकृतिक क्रिस्टल्स, रंग-बिरंगे खनिज और जापानी ज्वालामुखी चट्टानें शामिल की गई हैं। एक सेक्शन में बच्चों और बड़ों के लिए डायनासोर के अंडे और उनकी विभिन्न प्रजातियों (लगभग 200 से 400 प्रकार) के डिजिटल माडल्स प्रदर्शित किए हैं।

होलोग्राम तकनीक: तानसेन गाते हैं राग मल्हार

डिजिटल म्यूजियम में 16 गैलरी बनाई गई हैं, जो अपने आपमें अनूठी हैं। डिजिटल म्यूजियम के विभिन्न कक्षों में बनी गैलरी में ग्वालियर की क्षेत्रीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं का अनुभव आगंतुकों द्वारा किया जा रहा है। डिजिटल म्यूजियम में होलोग्राम तकनीक के जरिये संगीत सम्राट तानसेन का थ्रीडी दृश्य दिखाया जाता है। इस तकनीक से ऐसा प्रतीत होता है, मानो तानसेन खुद आपके सामने साक्षात बैठकर राग मल्हार या राग दीपक गा रहे हों, जो दर्शकों को एक जादुई और जीवंत अनुभव प्रदान करता है। गैलरी में डिजिटल उपकरणों की सहायता से ग्वालियर की स्थापत्य कला, चित्रकला, खेल, मनोरंजन सहरिया जीवन-शैली, परिधान, त्योहार, जीवन-यापन और संगीत आदि को दर्शाया गया है। ग्वालियर टाइमलाइन नामक कक्ष में ग्वालियर के इतिहास को बताया गया है।

इंडस्ट्रियल म्यूजियम: पर्यटक देखेंगे व्यापार का इतिहास

महाराज बाड़े पर ही बने इंडस्ट्रियल म्यूजियम की संरचनाओं की एक अनूठी विशेषता है। हालांकि यह म्यूजियम अभी तक पर्यटकों के लिए खोला तो नहीं गया, लेकिन यह बनकर तैयार है। जून में इसका शुभारंभ होने की संभावना है। इस म्यूजियम में विभिन्न गैलरियों के माध्यम से पर्यटकों को एक तरफ जहां ग्वालियर और आसपास के औद्योगिक विकास, फैक्ट्रियों और व्यापार के इतिहास को जानने का मौका मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ सेवन डी थियेटर जैसी अत्याधुनिक तकनीक युवाओं और बच्चों को बेहद आकर्षित करेगी। इस म्यूजियम में ग्वालियर के औद्योगिक सफर को बहुत ही अच्छे तरीके से विभिन्न गैलरियों के माध्यम से दर्शाया गया है। इस म्यूजियम के केंद्र में एक मूरिश आर्क है व केंद्रीय हाल बबल ऊंचाई का है और इसमें उत्तर प्रकाश की व्यवस्था है, जो औद्योगिक प्रकार की इमारत के लिए अच्छा है। इमारत को पत्थरो की ऐशलर मिश्रित चिनाई से बनाया गया है। ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा इंडस्ट्रियल म्यूजियम की स्थापना की गई है।



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