भिंड जिले के मेहगांव निवासी एक 73 वर्षीय बुजुर्ग जो लंबे समय से घुटनों के असहनीय दर्द से पीड़ित थे, अब इस सफल आपरेशन के बाद सामान्य जीवन की ओर लौट सके …और पढ़ें

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जिला अस्पताल मुरार में पहली बार टोटल नी रिप्लेसमेंट (घुटने का प्रत्यारोपण) जैसी जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया है। भिंड जिले के मेहगांव निवासी एक 73 वर्षीय बुजुर्ग जो लंबे समय से घुटनों के असहनीय दर्द से पीड़ित थे, अब इस सफल आपरेशन के बाद सामान्य जीवन की ओर लौट सकेंगे।
रीढ़ की हड्डी में इम्प्लांट
यह सर्जरी सामान्य आपरेशनों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण थी। मरीज की लम्बर स्पाइन (रीढ़ की हड्डी) में पहले से ही एक इम्प्लांट मौजूद था, जिसके कारण उन्हें एनेस्थीसिया (बेहोश करने की प्रक्रिया) देना बेहद जोखिम भरा और तकनीकी रूप से कठिन था। हालांकि, डाक्टरों की दक्षता ने इस बाधा को पार कर लिया।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने संभाली कमान
अस्थि रोग विशेषज्ञ डा. यश शर्मा ने वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डा. विपिन गोस्वामी के मार्गदर्शन में इस आपरेशन को अंजाम दिया। डा. श्रद्धा गोस्वामी और डा. सृष्टि वर्मा ने अपनी विशेषज्ञता से स्पाइन इम्प्लांट की चुनौती को संभालते हुए सुरक्षित एनेस्थीसिया दिया। इस पूरी प्रक्रिया में सिविल सर्जन डा. आरके शर्मा का विशेष सहयोग और प्रोत्साहन रहा।
टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी और इसके लाभ
क्या है टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी और इसके लाभ, टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी एक उन्नत चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें घुटने के पूरी तरह खराब हो चुके जोड़ को हटाकर वहां कृत्रिम इम्प्लांट लगाया जाता है। यह मुख्य रूप से आस्टियोआर्थराइटिस या जोड़ों के गंभीर दर्द से जूझ रहे मरीजों के लिए रामबाण है। सर्जरी के बाद मरीज को दर्द से स्थायी राहत मिलती है, चलने-फिरने की क्षमता वापस आती है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है।
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ओपीडी से आपरेशन तक का सफर
मेहगांव निवासी बुजुर्ग करीब एक माह पहले जिला अस्पताल की ओपीडी में परामर्श लेने पहुंचे थे। परीक्षण के दौरान डा. यश शर्मा ने पाया कि घुटना पूरी तरह खराब हो चुका है, जिसके बाद उन्होंने सर्जरी की सलाह दी। रविवार को मरीज को अस्पताल में भर्ती किया गया और सोमवार को विशेषज्ञों की टीम ने इस सर्जरी को पूरा किया।
उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल में इस तरह की आधुनिक सर्जरी की शुरुआत होने से अब गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को निजी अस्पतालों के भारी-भरकम खर्च से राहत मिलेगी।
