एमपीआइडीसी की बैठक में डीआरडीई, वायुसेना, बीएसएफ सहित देश की दिग्गज कंपनियों के प्रतिनिधियों ने रोडमैप तैयार किया है।

Publish Date: Fri, 26 Jun 2026 08:51:48 AM (IST)Updated Date: Fri, 26 Jun 2026 08:52:44 AM (IST)

ग्वालियर-चंबल बनेगा डिफेंस हब, सेना और वायुसेना की जरूरतें पूरी करेंगे स्थानीय MSME उद्योग
एमपीआइडीसी की बैठक में मौजूद सेना, वायु सेना, बीएसएफ सहित अन्‍य रक्षा संस्‍थानों के प्रतिनिधि। नईदुनिया

HighLights

  1. छोटे कारखानों को मिला सेना का साथ
  2. ड्रोन और हथियार तकनीक का खुलेगा रास्ता
  3. दिल्ली के राष्ट्रीय सेमिनार में पेश होगी रिपोर्ट

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर-चंबल अंचल अब सिर्फ खेती या आम उद्योगों के लिए नहीं, बल्कि भारतीय सेना के लिए हथियार, ड्रोन और अत्याधुनिक तकनीक बनाने वाले एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। केंद्र सरकार की एक विशेष योजना के तहत गुरुवार को ग्वालियर में रक्षा क्षेत्र से जुड़े देश के शीर्ष संस्थानों और बड़ी कंपनियों की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

छोटे कारखानों में बनेंगे पार्ट्स

यानि डीआरडीओ, बीएसएफ व वायुसेना को रक्षा उपकरण बनाने के लिए जो छोटे छोटे पार्ट्स की जरूरत होगी, उन्हें अंचल के छोटे कारखानों से बनवाया जाएगा। मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम की क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक अनीशा श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में डीआरडीई, भारतीय वायुसेना ग्वालियर एयरबेस, टियर स्मोक यूनिट, अडानी डिफेंस, और एमआइटीएस ड्रोन स्कूल जैसी बड़ी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

राष्ट्रीय सेमीनार में प्रस्तुत होगी रिपोर्ट

एमपीआइडीसी की कार्यकारी निदेशक अनीशा श्रीवास्तव के मुताबिक अगस्त महीने में इस विषय पर दिल्ली में राष्ट्रीय सेमीनार आयोजित किया जाएगा। इसमें इस बैठक की रिपोर्ट व ग्वालियर चंबल में रक्षा उद्योग को लेकर संभावनाओं की रिपोर्ट को पेश किया जाएगा।

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बैठक में उपस्थित दिग्गज। नईदुनिया

बैठक में दिग्गजों ने क्या सुझाव दिए

बैठक के दौरान सभी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए। स्थानीय छोटे उद्योगों के मालिकों और विशेषज्ञों ने कहा कि यदि सरकार ग्वालियर में ही रक्षा उपकरणों की जांच और उन्हें पास करने की सुविधा दे दे, तो यहां के व्यापारी बहुत तेजी से सेना की जरूरतों का सामान बनाना शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा एमआइटीएस ड्रोन स्कूल और रुस्तमजी इंस्टीट्यूट जैसे शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर युवाओं को इस उद्योग के लायक बनाने पर भी सहमति बनी।

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