देश के कई हिस्सों में पेट्रोल और डीजल पर अघोषित तौर पर की जा रही राशनिंग यानी सीमित आपूर्ति के कारण ग्वालियर-चंबल अंचल के ट्रांसपोर्टर्स की मुश्किलें …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 31 May 2026 07:37:22 PM (IST)Updated Date: Sun, 31 May 2026 07:37:22 PM (IST)

ग्वालियर के ट्रकों को यूपी, राजस्थान और दिल्ली में नहीं मिल रहा पर्याप्त डीजल, माल की डिलीवरी हो रही प्रभावित
नहीं मिल रहा पर्याप्त डीजल (AI Generated Image)

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ईरान-अमेरिका के युद्ध के चलते वैश्विक स्तर पर उपजे कच्चे तेल के संकट का असर अब ग्वालियर के ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर दिखने लगा है। देश के कई हिस्सों में पेट्रोल और डीजल पर अघोषित तौर पर की जा रही राशनिंग यानी सीमित आपूर्ति के कारण ग्वालियर-चंबल अंचल के ट्रांसपोर्टर्स की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्थिति यह है कि ग्वालियर से उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली जैसे राज्यों के बीच दौड़ने वाले ट्रकों को बाहरी राज्यों में जरूरत के मुताबिक पर्याप्त डीजल नहीं मिल पा रहा है, जिससे माल ढुलाई का पूरा सिस्टम चरमरा रहा है।

दूसरे राज्यों के पंपों पर ट्रकों को मिल रहा सीमित डीजल

ग्वालियर-चंबल से हर दिन 400 से अधिक सैकड़ों ट्रक कपड़ा, दवाइयां, दालें और अन्य औद्योगिक उत्पाद लेकर दिल्ली, जयपुर, आगरा, कानपुर और लखनऊ जैसे बड़े शहरों से आते हैं और यहां से माल लाते हैं। ट्रांसपोर्ट यूनियन के पदाधिकारियों और ट्रक ऑपरेटरों के मुताबिक जैसे ही ट्रक उत्तर प्रदेश, राजस्थान या दिल्ली की सीमा में प्रवेश करते हैं, उन्हें किल्लत का सामना करना पड़ता है।

बाहरी राज्यों के पेट्रोल पंपों पर तेल कंपनियों की ओर से अघोषित पाबंदी लगा दी गई है। वहां हर ट्रक को उसकी टैंक क्षमता के अनुसार नहीं, बल्कि एक निश्चित मात्रा जैसे 50 या 100 लीटर में ही डीजल दिया जा रहा है। इसके कारण ड्राइवरों को रास्ते में बार-बार अलग-अलग पंपों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे समय पर माल की डिलीवरी नहीं हो पा रही है।

इंडस्ट्रियल डीजल की बढ़ी कीमतों ने बिगाड़ा खेल

ट्रांसपोर्टर्स की मुसीबतें केवल राशनिंग तक ही सीमित नहीं हैं। थोक उपभोक्ताओं यानी उद्योगों और बड़े ट्रांसपोर्ट यार्ड्स के लिए मिलने वाले इंडस्ट्रियल डीजल की दरों में हाल ही में की गई अप्रत्याशित बढ़ोतरी ने आग में घी का काम किया है। बल्क में मिलने वाला डीजल महंगा होने से अब ज्यादातर ट्रांसपोर्टर्स फुटकर पंपों पर निर्भर हो गए हैं, जिससे इन पंपों पर भी भीड़ और डीजल की कमी की स्थिति पैदा हो गई है।

माल की डिलीवरी नहीं हो पाती समय पर

ईंधन की इस अघोषित किल्लत और देरी के कारण लश्कर के दाल बाजार, नया बाजार और लोहा मंडी जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में माल की आवक और जावक दोनों प्रभावित हो रही है। समय पर कच्चा माल न मिलने से स्थानीय उद्योगों में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका खड़ी हो गई है। ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि यदि खाड़ी युद्ध के कारण बने ये हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो आने वाले दिनों में ट्रकों के पहिए थम सकते हैं, जिससे बाजारों में जरूरी सामानों की भारी किल्लत और महंगाई देखने को मिल सकती है।

ग्वालियर में तो ट्रकों को डीजल पूरा मिल जाता है। लेकिन अधिकतर ट्रक ऑपरेटर राजस्थान व उत्तर प्रदेश की सीमा तक के लिए ही डीजल लेते हैं। क्योंकि इन राज्यों में डीजल की कीमत प्रदेश से कम है। लेकिन वर्तमान में राजस्थान, उत्तर प्रदेश व दिल्ली में ट्रकों को एक बार में सीमित मात्रा में ही डीजल मिल रहा है। ऐसे में बार-बार डीजल के लिए पेट्रोल पंपों पर वाहनों को खड़ा होना पड़ता है। इसलिए माल न तो समय पर आ पाता है और न ही पहुंच पाता है। – सुनील माहेश्वरी, अध्यक्ष, मोटर ट्रांसपोर्ट यूनियन ग्वालियर

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