नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल के ग्वालियर दौरे से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय में ब्लाक डेवलपमेंट काउंसिल (बीडीसी) की समीक्षा बैठक से लेकर सिविल अस्पताल हजीरा और बिरलानगर के निरीक्षण तक एसीएस का सख्त रुख नजर आया। उन्होंने न केवल जीआरएमसी द्वारा बिना योजना के बनाए गए निर्माण प्रस्तावों को खारिज किया, बल्कि अधिकारियों को दो टूक हिदायत दी कि सरकारी धन की बर्बादी क्यों हो, इसका उपयोग जनता की सुविधा के लिए करें।

भवन तोड़ने की नौबत क्यों आई?

जीआरएमसी में समीक्षा बैठक के दौरान उस वक्त अजीब स्थिति निर्मित हो गई जब कार्डियोलाजी विभाग और बर्न यूनिट को तोड़ने का प्रस्ताव सामने आया। एसीएस ने पूछा कि जो भवन महज 10 और तीन साल पुराने हैं, उन्हें तोड़ने की नौबत क्यों आई? क्या इंजीनियरों और प्रबंधन के बीच कोई तालमेल नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना ठोस आधार के किसी भी चालू भवन को ध्वस्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रस्ताव के दोबारा रिव्यू के आदेश दिए। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या संबंधित विभागाध्यक्ष (एचओडी) से इसकी अनुमति ली गई है।

ग्वालियर की पहचान दिखे भवनों के डिजाइन में: उन्होंने प्रस्तावित भवनों के डिजाइन को लेकर कहा कि इनमें ग्वालियर की सांस्कृतिक और स्थापत्य पहचान झलकनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने विशेषज्ञ समिति गठित कर डिजाइन को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। टीबी अस्पताल के नए भवन पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में 100 बिस्तरों वाले अस्पताल की आवश्यकता नहीं है। प्रधानमंत्री के 2030 तक टीबी मुक्त भारत अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने अस्पताल की क्षमता घटाकर 60 बेड करने के निर्देश दिए, जिसमें 10 बेड आइसीयू और 50 सामान्य वार्ड के हों।

डायलिसिस मशीनों का पूरा उपयोग नहीं होने पर फटकार

हजीरा अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में एसीएस ने पाया कि एक मशीन पर केवल दो मरीजों की डायलिसिस की जा रही है। स्टाफ ने मरीजों की संख्या कम होने की बात कही, लेकिन एसीएस ने निर्देश दिए कि मशीनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाए और एक मशीन पर कम से कम चार मरीजों की डायलिसिस हो।

एसीएस ने पूछा- अस्पताल में डाक्टर ज्यादा जरूरी है या पार्किंग, प्रबंधन ने साधी चुप्पी

बिरला नगर सिविल अस्पताल के निरीक्षण के दौरान एसीएस ने अस्पताल प्रभारी डा. जगदीश मसूरिया से पूछा कि पास में हजीरा सिविल अस्पताल होने के बावजूद यहां सिविल अस्पताल संचालित करने की आवश्यकता क्या है। जब प्रभारी ने पार्किंग की कमी का मुद्दा उठाया तो एसीएस ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अस्पताल में पार्किंग ज्यादा जरूरी है या चिकित्सकों की उपलब्धता। इस सवाल पर अस्पताल प्रबंधन चुप हो गया।

हजीरा अस्पताल में इमरजेंसी और ओटी की व्यवस्था पर नाराजगी

एसीएस वर्णवाल ने हजीरा सिविल अस्पताल का निरीक्षण किया। इमरजेंसी विभाग में लोगों को जूते-चप्पल पहनकर घूमते देख उन्होंने नाराजगी जताई। बंद पड़े आपरेशन थियेटर को खुलवाने पर अंदर पुराने सामान का ढेर मिला, जिस पर उन्होंने सवाल उठाए। वार्ड और शौचालयों की सफाई देखने के बाद उन्होंने टिप्पणी की कि संभवत: उनके आने से पहले विशेष सफाई कराई गई है। इस पर मौजूद एक चिकित्सक ने कहा कि क्षेत्र के मंत्री गंदगी देखकर स्वयं सफाई करने लगते हैं। यह सुनकर एसीएस मुस्कुरा पड़े।

आनलाइन सिस्टम के बाद भी रजिस्टर में एंट्री पर जताई नाराजगी

सिविल अस्पताल हजीरा के दवा स्टोर के निरीक्षण के दौरान एसीएस ने स्टाक प्रबंधन की जानकारी ली। जब दवा स्टोर प्रभारी विवेक त्यागी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके और रजिस्टर दिखाए, तो उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब पूरा सिस्टम आनलाइन है तो अलग से रजिस्टर में एंट्री करने का औचित्य नहीं है। उन्होंने दोहरी एंट्री बंद करने के निर्देश दिए।

दवा स्टोर अव्यवस्थित ओटी में भी मिली खामियां

बिरला नगर अस्पताल में निरीक्षण के दौरान एसीएस ने पाया कि दवा स्टोर में नए बैच की दवाएं आगे और पुराने बैच की पीछे रखी गईं थीं। उन्होंने इसे लापरवाही बताते हुए व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। आपरेशन थियेटर में गेट का सेंसर खराब मिला और अंदर लगी रंगीन पट्टियों पर भी उन्होंने असंतोष जताया। अधिकारियों को जल्द सुधार करने के निर्देश दिए गए।



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