मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों में केनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया है। एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत के बाद पूरे क्षेत्र में निगरानी और रोकथाम के उपाय तेज कर दिए गए हैं। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन T-141 और उसके चार शावकों में असामान्य गतिविधियां दिखाई देने पर तत्काल रेस्क्यू कर उपचार शुरू किया गया। सैंपल को स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फोरेंसिक हेल्थ जबलपुर भेजा गया, जहां जांच में केनाइन डिस्टेंपर वायरस की पुष्टि हुई। इलाज के प्रयासों के बावजूद बाघिन और शावकों को बचाया नहीं जा सका। सीडीवी वायरस की पुष्टि के बाद वन्यजीव चिकित्सकों ने प्रोटोकाल के अनुसार उनका भस्मीकरण किया गया। वहीं, जिस क्षेत्र में बाघिन एव शाव को रेस्क्यू किया गया था, वहां अन्य बाघों की उपस्थिति को देखने के लिए हाथी दल से सतत गश्ती कराई जा रही है। वन विभाग ने वायरस के संक्रमण से दूसरे बाघों और वन्यजीवों को बचाने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। वहीं, मुक्की स्थित क्वारेंटाइन एंड ट्रीटमेंट सेंटर, परिवहन पिंजरे एवं परिवहन वाहनों का सीडी वायरस प्रोटोकॉल अनुसार सेनेटाइजेशन किया गया। 

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क्या है केनाइन डिस्टेंपर वायरस

केनाइन डिस्टेंपर वायरस एक संक्रामक बीमारी है, जो आमतौर पर कुत्तों, बाघ, शेर, लोमड़ी जैसे मांसाहारी जानवरों को प्रभावित करता है। यह संक्रमित जानवर की लार से तेजी से फैलता है। वहीं, यदि इससे संक्रमित कुत्ते को बाघ काट ले तो भी वह संक्रमित हो सकता है। यह वायरस श्वसन, पाचन और तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है और कई मामलों में जानलेवा साबित होता है। हालांकि यह वायरस मनुष्यों को संक्रमित नहीं करता है। यह वायरस धीरे धीरे शरीर के अंगों को प्रभावित करता है। इसके शुरुआत लक्ष्य तेज बुखार, आंख और नाक से पानी आना, सुस्ती और कमजोरी जैसे लक्षण शुरुआत में दिखाई देते है। 

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वन विभाग ने निगरानी तेज की 

घटना के बाद पूरे इलाके में वन विभाग ने सघन निगरानी शुरू कर दी गई है। वन विभाग ने 40 से अधिक कैमरा ट्रैप लगाए हैं और हाथी दल के जरिए लगातार गश्त कराई जा रही है, ताकि अन्य बाघों की स्थिति पर नजर रखी जा सके। संक्रमित बाघिन और उसके शावकों ने जिन जल स्रोतों से पानी पीते थे, उसके सैंपल भी जांच के लिए भेजे है। वन्यजीवों के नमूनों की जांच भी कराई जा रही है। वहीं, पर्यटक और कर्मचारियों को वन्यजीवों में असमान्य लक्षण दिखने पर तुरंत सूचना देने को कहा गया है। वहीं, टाइगर रिजर्व के सभी प्रवेश द्वारों पर पर्यटक वाहनों को डिसइंफेक्टेंट साल्यूशन से सेनीटाईजेशन के बाद ही ही प्रवेश देने के निर्देश दिए गए हैं। 

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संक्रमण रोकने के लिए विशेष अभियान

वायरस के फैलाव को रोकने के लिए आसपास के गांवों में आवारा और पालतू कुत्तों का टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है। पशु चिकित्सा विभाग के साथ समन्वय कर कुत्तों की स्वास्थ्य जांच और उनकी संख्या नियंत्रण के लिए भी कार्रवाई की जा रही है। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कान्हा टाइगर रिजर्व की तरफ से खापा एवं खटिया परिक्षेत्रों के 404 कुत्तों का टीकाकरण किया जा चुका है। इसके अलावा क्षेत्र के आसपास के गांवों का भी टीकारण किया जा रहा है। 

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वैक्सीनेशन पहले होना था, समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए 

वन्यजीव विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे ने कहा कि बाघों की मौत केनाइन डिस्टेंपर वायरस के कारण हुई है। घटना के बाद अब वन विभाग ने टाइगर रिजर्व के आसपास पालतू पशुओं का वैक्सीनेशन अभियान शुरू किया है, जबकि यह काम पहले ही किया जाना चाहिए था। उन्होंने बताया कि एनटीसीए के स्पष्ट निर्देश हैं कि टाइगर रिजर्व के आसपास नियमित रूप से वैक्सीनेशन होना चाहिए, लेकिन इस दिशा में पहले पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।  

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संक्रमण रोकने हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं 

चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन समीता राजौरा ने कहा कि वायरस से दूसरे वन्यजीवों को संक्रमित होने से रोकने के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे है। वहीं, कान्हा टाइगर रिजर्व के आसपास डोमेस्टिक एनीमल का टीकाकरण कराया जा रहा है। विभाग की तरफ से हर संभव प्रयास और वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। 

 



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