राजधानी भोपाल स्थित मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में चार दिन तक चली लंबी और गहन बैठकों ने संगठन की तस्वीर बदलने की दिशा तय कर दी है। बैठक में जिले-दर-जिले रिपोर्ट, जमीनी फीडबैक और कार्यप्रणाली की गहराई से समीक्षा के बाद एक बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया गया है, जिसका असर अब दिखाई देगा। इन बैठकों में हर जिले की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। संगठन की सक्रियता, स्थानीय स्तर पर कार्यक्रमों की स्थिति, कार्यकर्ताओं की भागीदारी और नेतृत्व की प्रभावशीलता जैसे मुद्दों को केंद्र में रखा गया। खास तौर पर जिलाध्यक्षों के कामकाज का विस्तृत परफॉर्मेंस रिव्यू किया गया, जिसमें यह देखा गया कि किस जिले में संगठन मजबूत है और कहां पर अपेक्षित काम नहीं हो पाया। बैठकों से मिली रिपोर्ट के आधार पर यह साफ हुआ कि कई जिलों में संगठनात्मक गतिविधियां कमजोर पड़ी हैं। इसी के चलते पार्टी ने जिलाध्यक्षों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की है, और जहां प्रदर्शन लगातार कमजोर पाया गया है, वहां हटाने तक की तैयारी की जा रही है। यह कदम साफ संकेत देता है कि अब जिम्मेदारी सिर्फ पद नहीं, बल्कि प्रदर्शन से तय होगी।
गहराई से हुई समीक्षा, हर जिले पर अलग फोकस
चार दिन तक चली इस मैराथन बैठक में हर जिले को अलग-अलग लेकर चर्चा की गई। फीडबैक सिर्फ औपचारिक नहीं था, बल्कि जमीनी स्तर से जुटाई गई रिपोर्ट के आधार पर स्थिति का आकलन किया गया। संगठन के अंदरूनी ढांचे, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और स्थानीय नेतृत्व की पकड़ को परखा गया।
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आगे का रोडमैप
– जिलेवार परफॉर्मेंस की नियमित समीक्षा
– कमजोर जिलों में तत्काल बदलाव
– ब्लॉक और बूथ स्तर तक संगठन को री-एक्टिव करना
– कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संवाद और फील्ड एक्टिविटी बढ़ाना
– स्थानीय मुद्दों पर संगठन की तेज प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना
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पदाधिकारियों को दिया बड़ा संदेश
इन बैठकों के बाद कांग्रेस ने अपने संगठन को लेकर स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अब निष्क्रियता नहीं चलेगी, हर पद पर जवाबदेही तय होगी। जो नेतृत्व जमीन पर सक्रिय रहेगा, वही संगठन में बना रहेगा। पार्टी अब फैसले जल्दबाजी में नहीं, बल्कि गहन समीक्षा और ठोस फीडबैक के आधार पर ले रही है। जिलाध्यक्षों में बदलाव इसी बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में पूरे संगठन में दिखाई देगा।