मध्य प्रदेश बोर्ड के 10वीं और 12वीं के इस साल के नतीजों में एक बड़ा बदलाव साफ दिखाई दिया। सरकारी स्कूलों ने प्रदर्शन में प्राइवेट स्कूलों को पीछे छोड़ दिया। रिजल्ट के आंकड़े बताते हैं कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार अब जमीन पर नजर आने लगा है।

10वीं में सरकारी स्कूलों ने मारी बाजी

हाईस्कूल (10वीं) परीक्षा में शासकीय विद्यालयों का परीक्षाफल 76.80 प्रतिशत रहा, जबकि अशासकीय (प्राइवेट) स्कूलों का रिजल्ट 68.64 प्रतिशत रहा। यानी सरकारी स्कूल करीब 8 प्रतिशत से आगे रहे। इस परीक्षा में कुल 8,97,061 छात्र शामिल हुए, जिनमें 73.42% नियमित और 26.38% स्वाध्यायी परीक्षार्थी पास हुए। खास बात यह रही कि छात्राओं का प्रदर्शन (77.52%) छात्रों (69.31%) से बेहतर रहा।

12वीं में भी सरकारी स्कूल आगे

हायर सेकेंडरी (12वीं) में भी शासकीय स्कूलों का दबदबा देखने को मिला। यहां सरकारी स्कूलों का रिजल्ट 80.43 प्रतिशत रहा, जबकि प्राइवेट स्कूल 69.67 प्रतिशत पर सिमट गए। कुल 6,89,746 परीक्षार्थियों में से 76.01% नियमित छात्र पास हुए, जो पिछले 16 साल में सबसे बेहतर परिणाम बताया जा रहा है। यहां भी छात्राओं ने 79.41% के साथ छात्रों (72.39%) से बेहतर प्रदर्शन किया।

टॉपर्स में भी दिखा सरकारी स्कूलों का दम

12वीं की प्रावीण्य सूची में वाणिज्य संकाय की खुशी राय (शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय, भोपाल) ने 494 अंक हासिल कर टॉप किया। वहीं चांदनी विश्वकर्मा (प्राइवेट स्कूल) ने भी इतने ही अंक लेकर टॉप लिस्ट में जगह बनाई।10वीं में प्रतिभा सिंह सोलंकी ने 500 में से 499 अंक हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया।

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छात्राओं का दबदबा जारी

दोनों कक्षाओं की मेरिट लिस्ट में छात्राओं ने छात्रों से ज्यादा स्थान हासिल किए। 10वीं में 378 में से 235 छात्राएं और 12वीं में 221 में से 158 छात्राएं मेरिट में शामिल रहीं।

अब पूरक नहीं, मिलेगा दूसरा मौका

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत इस बार पूरक परीक्षा की जगह ‘द्वितीय अवसर परीक्षा’ शुरू की गई है। जो छात्र फेल हुए हैं या अपने अंक सुधारना चाहते हैं, वे इस परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

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CM ने शिक्षकों को दिया श्रेय

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बेहतर परिणाम पर शिक्षकों और छात्रों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह परिणाम शिक्षकों की मेहनत और शिक्षा व्यवस्था में सुधार का संकेत है।

 



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