हैरानी की बात यह है कि जिन क्षेत्रों में फोरलेन सड़कों का निर्माण हुआ है, वहां ठेकेदारों द्वारा टावरों के आसपास की सुरक्षात्मक मिट्टी और मुरम को अवैध रूप से खोदकर निर्माण कार्यों में खपा दिया गया है। ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, सतना और शाजापुर जैसे शहरों के आसपास स्थिति सबसे भयावह है। इसके अलावा नदियों और जलाशयों के किनारे स्थित टावरों के नीचे से भी रेत माफियाओं ने गहरी खुदाई कर दी है, जिससे टावरों की संरचनात्मक मजबूती खतरे में पड़ गई है।
4,500 टावर प्रभावित हुए तो प्रदेश में होगा ब्लैकआउट
ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक ट्रांसमिशन टावर पूरी तरह जमीन की पकड़ पर आधारित होते हैं। यदि नींव के पास से मिट्टी हटाई जाती है, तो तेज हवाओं के दबाव में टावर झुक सकता है या गिर सकता है। यदि कुल टावरों में से मात्र पांच प्रतिशत (करीब 4500 टावर) भी इस अवैध खुदाई के कारण प्रभावित होते हैं, तो पूरे प्रदेश का ग्रिड असंतुलित हो सकता है। यह स्थिति न केवल स्थानीय बिजली कटौती, बल्कि बड़े स्तर पर ”ग्रिड फेल्योर” का कारण बन सकती है।
अफसरों की लापरवाही: शिकायतों को किया दरकिनार
इस संकट के पीछे ट्रांसमिशन अधिकारियों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। सतना और शुजालपुर जैसे क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर बार-बार शिकायतें मिलने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने समय पर निरीक्षण नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि साधारण एंगल चोरी से शुरू हुआ मामला अब टावरों की नींव खोदने तक पहुंच गया है।
इन जिलों में रेड अलर्ट जैसी स्थिति
ग्वालियर-चंबल: ग्वालियर और आसपास के फोरलेन कारिडोर
मध्य क्षेत्र: शाजापुर, शुजालपुर, मंदसौर, बड़वाह
विंध्य एवं बुंदेलखंड: सतना, सीधी, सिंगरौली, छतरपुर, दमोह
महाकौशल: जबलपुर, अनूपपुर, शहडोल, मंडला।
ट्रांसको का अब शुरू होगा अभियान
ट्रांसको मुख्यालय ने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को संवेदनशील टावरों की सूची बनाने और जिला प्रशासन के समन्वय से ”क्रैश प्रोग्राम” चलाने के निर्देश दिए हैं। विभाग अब युद्ध स्तर पर सर्वे कर इन गड्ढों को भरने और अवैध उत्खनन करने वालों पर एफआइआर दर्ज कराने की तैयारी में है।
फैक्ट फाइल
90,000 कुल ट्रांसमिशन टावर हैं मध्यप्रदेश में
05 प्रतिशत टावर भी प्रभावित हुए तो पूरा ग्रिड बैठ सकता है
02 माह के भीतर आंधी-तूफान का दौर शुरू होने की आशंका है
1258 प्रदेश में कुल ईएचवी फीडरों की संख्या
89,300 प्रदेश में कुल ईएचवी टावरों की संख्या
43,612 प्रदेश में ट्रांसमिशन लाइनों की कुल लंबाई
ट्रांसमिशन टावर कमजोर हो गए हैं
डीके अग्रवाल, मुख्य अभियंता, एक्स्ट्रा हाइ टेंशन लाइन मेंटेनेंस, मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी का कहना है कि हां, मध्यप्रदेश के अनेक हिस्सों में इस तरह ट्रांसमिशन टावर के नजदीक अवैध उत्खनन की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। जिससे ट्रांसमिशन टावर कमजोर हो गए हैं, जो आंधी तूफान या अधिक वर्षा में ध्वस्त हो सकते हैं जिससे लंबे समय तक विद्युत व्यवधान हो सकता है। ट्रांसमिशन कंपनी स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर इस पर प्रतिबंध लगाने के लिए प्रयासरत है।।
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