प्रदेश में फर्जी एमबीबीएस डिग्री और सरकारी भर्ती घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले सवाल खड़े हो रहे हैं। इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड हीरा सिंह कौशल अब पुलिस गिरफ्त में है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 2021 में फर्जी भर्ती कांड में गिरफ्तार होकर जेल जाने वाला आरोपी दोबारा सरकारी नौकरी में कैसे लौट आया? किसके संरक्षण में वह स्वास्थ्य विभाग के भीतर रहकर फर्जी डिग्री और नौकरी का खेल चलाता आ रहा है? दमोह और जबलपुर में फर्जी डॉक्टरों के पकड़े जाने के बाद पुलिस ने भोपाल से हीरा सिंह कौशल को गिरफ्तार किया।

अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया है कि आरोपी खुद स्वास्थ्य विभाग में सीहोर जिले के बिलकिसगंज में रेडियोग्राफर के पद पर पदस्थ है। आरोप है कि उसने सरकारी सिस्टम और विभागीय संपर्कों का इस्तेमाल कर फर्जी एमबीबीएस डिग्री, जाली मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन और संविदा भर्ती का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया। वह 2007 में मुलताई में एक्सरे टेक्निशियन के पद पर पदस्थ हुआ था। इसके बाद से वह लगातार फर्जी डिग्री और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की सांठगांठ करके सरकारी नौकरी दिलाने का काम कर रहा है। 

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फर्जी नियुक्ति पत्र मामले में पुलिस ने पकड़ा था 

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि हीरा सिंह का नाम पहली बार सामने नहीं आया है। वर्ष 2021 में बैतूल में स्वास्थ्य विभाग में स्थायी नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से लाखों रुपये लेने के मामले में वह गिरफ्तार हो चुका है। उस समय पुलिस जांच में सामने आया था कि आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देता था। कई युवाओं को फर्जी नियुक्ति पत्र तक थमा दिए गए थे। यहां तक कि ऐसे पदों के लिए भी नियुक्ति पत्र जारी किए गए, जिनकी योग्यता आवेदकों के पास थी ही नहीं। हालांकि, जानकारी के अनुसार वह एनएचएम और स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर नौकरी दिलाने का काम भी कर रहा था। अब यह जांच का विषय है कि उसने कितने लोगों को और किन पदों पर नौकरी दिलाई है? 

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जेल से बाहर आने के बाद फिर मिल गई नौकरी 

2021 के मामले में शिकायत के बाद हीरा सिंह करीब छह महीने जेल में रहा, लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद वह फिर से सरकारी नौकरी में लौट आया। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या विभाग ने उसकी पृष्ठभूमि की जांच नहीं की, या फिर किसी प्रभावशाली संरक्षण के चलते उसे दोबारा सिस्टम में जगह मिल गई? जानकारों का कहना है कि हीरा सिंह लंबे समय से एनएचएम की संविदा भर्ती प्रक्रिया और विभागीय सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठा रहा था। यही नहीं आरोप यह भी है कि वह बिना ड्यूटी पर जाए पूरा वेतन ले रहा था। इस मामले की भी जांच भी जरूरी है कि उसको किसका संरक्षण था। 

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एक मई से छुट्टी से पर है हीरा सिंह 

इधर, सीहोर सीएमएचओ डॉ. सुधीर डेहरिया का कहना है कि हीरा सिंह एक मई से छुट्टी पर है और उसके खिलाफ लगे आरोपों की जांच कराई जाएगी।



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