मध्यप्रदेश में मानसून की दस्तक से ठीक पहले डीजल की किल्लत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बुवाई के समय 200 लीटर डीजल की लिमिट से परेशान किसानों ने महिदपुर विधायक दिनेश जैन की कार रोककर गुहार लगाई, जिसके बाद विधायक अधिकारियों पर भड़क उठे।

दरअसल, केंद्र सरकार ने डीजल की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए मई 2025 एक आदेश जारी किया था। इसके तहत पेट्रोल पंप पर एक बार में निजी वाहनों को 200 लीटर से ज्यादा डीजल न देने का नियम लागू है। यह नियम कृषि कार्यों के लिए छूट देता है, लेकिन इसके लिए एसडीएम या कृषि विभाग से परमिट जरूरी है। ग्राउंड पर इसी परमिट प्रक्रिया में देरी से किसान उलझ रहे हैं।

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उज्जैन के महिदपुर में डीजल न मिलने से परेशान किसानों ने विधायक दिनेश जैन का रास्ता रोका। किसानों का दर्द सुनकर विधायक ने मौके से ही अधिकारी को फोन लगाया और सख्त लहजे में कहा, क्या देश खरीद लिया कंपनी वालों ने? किसान डीजल लेकर जाएंगे… खाली हाथ नहीं जाएंगे… अधिकारी को बोलो— अभी के अभी डीजल भरे। उन्होंने चेताया कि बुवाई के समय डीजल न मिलने से किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएंगे। विधायक ने 200 लीटर की लिमिट पर सवाल उठाते हुए कहा कि 40 लीटर का यह कुप्पा है, इसमें डीजल भरा जाएगा या नहीं… मतलब सभी जुल्म किसानों पर होगा… यह कैसा तुगलकी आदेश है।

एमपी कांग्रेस ने घटना का वीडियो X पर शेयर किया

एमपी कांग्रेस ने घटना का वीडियो X पर शेयर कर सरकार को घेरा। कांग्रेस ने लिखा- बुवाई का समय है, लेकिन सरकार राहत देने के बजाय मुश्किलें बढ़ा रही है। अन्नदाता कब तक नाकामियों की कीमत चुकाता रहेगा…? विधायक की फटकार के बाद प्रशासन ने किसानों को राहत देने का भरोसा दिया है। मौसम विभाग के अनुसार 3-4 दिन में मानसून आ सकता है, ऐसे में बुवाई के लिए किसानों को तुरंत डीजल चाहिए। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र के नियम में कृषि के लिए छूट है, लेकिन परमिट सिस्टम को सरल करना जरूरी है ताकि बुवाई प्रभावित न हो।

 



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