इंदौर में इस समय देश के दो प्रमुख राज्यों की समृद्ध पाक कला और पारंपरिक स्वादों का एक अनूठा उत्सव मनाया जा रहा है। जायका सफर : बिहार टू छत्तीसगढ़ नामक विशेष फूड फेस्टिवल में इसकी शुरुआत हो चुकी है। यह आयोजन 19 जून से लेकर 28 जून तक जारी रहेगा, जहां आने वाले मेहमानों को इन दोनों राज्यों के सुदूर ग्रामीण अंचलों और जनजातीय समुदायों की रसोई से निकले अद्भुत और प्रामाणिक व्यंजनों का स्वाद चखने का बेहतरीन अवसर मिल रहा है। फेयरफील्ड बाय मैरियट में आयोजित इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य दोनों राज्यों की प्राचीन और समृद्ध पारंपरिक खाद्य संस्कृति को एक साझा मंच पर लाकर इंदौर के भोजन प्रेमियों के सामने प्रस्तुत करना है।
ग्रामीण क्षेत्रों की स्थानीय सामग्री और प्रामाणिक विधियों पर विशेष ध्यान
इस भव्य आयोजन को लेकर मैनेजर सुदीप सिन्हा ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि भारत की वास्तविक विविधता उसके खानपान के तौर-तरीकों में सबसे अनूठे और खूबसूरत रूप में दिखाई देती है। उन्होंने आगे बताया कि जायका सफर के माध्यम से बिहार और छत्तीसगढ़ की बेहद समृद्ध और पुरानी पाक परंपराओं को इंदौर के नागरिकों तक जीवंत रूप में पहुंचाने का एक ईमानदार प्रयास किया गया है। सुदीप सिन्हा के अनुसार, इस उत्सव के लिए विशेष मेन्यू तैयार करते समय सभी व्यंजनों के मूल स्वाद और उनकी पारंपरिक निर्माण विधियों को पूरी तरह बरकरार रखने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इन पकवानों को तैयार करने के लिए विशेष रूप से स्थानीय मसालों और पारंपरिक सामग्रियों का ही उपयोग किया गया है, ताकि मेहमानों को बिहार और छत्तीसगढ़ की वास्तविक और जमीनी खाद्य संस्कृति की गहन अनुभूति कराई जा सके। इस विशेष आयोजन को इंदौर के मेहमानों से बेहद उत्साहजनक और अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है, और यह फूड फेस्टिवल लोगों को भारत के हृदय क्षेत्र की अनूठी खाद्य संस्कृति को बहुत करीब से देखने और समझने का एक शानदार मौका दे रहा है।
माटी का स्वाद थीम और सांस्कृतिक रंगत
यह पूरा फूड फेस्टिवल माटी का स्वाद नामक एक बेहद खास थीम पर आधारित है। इसके अंतर्गत बिहार और छत्तीसगढ़ के उन चुनिंदा व्यंजनों को प्रमुखता से शामिल किया गया है, जो वहां की स्थानीय संस्कृति, ऐतिहासिक परंपराओं और विभिन्न समुदायों की मुख्य पहचान माने जाते हैं। इस फेस्टिवल के माध्यम से आयोजकों ने दोनों ही राज्यों की अमूल्य पाक विरासत को उसके सबसे प्रामाणिक और मूल रूप में पेश करने की कोशिश की है। यहां आम तौर पर गांवों की रसोई में दैनिक रूप से बनने वाले पारंपरिक पकवानों से लेकर दूरस्थ क्षेत्रों के जनजातीय समुदायों द्वारा विशेष अवसरों पर बनाए जाने वाले अनूठे व्यंजन तक मेहमानों की थाली में परोसे जा रहे हैं।
स्वाद के इस बेहतरीन सफर को और अधिक यादगार बनाने के लिए रेस्टोरेंट के आंतरिक माहौल और सजावट में भी दोनों राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक झलक को बखूबी पिरोया गया है। वहां की पारंपरिक कलात्मक आकृतियों और लोक संस्कृति से प्रेरित भव्य सजावट यहां आने वाले मेहमानों के भोजन के अनुभव को कई गुना अधिक आकर्षक और जीवंत बना रही है। इस पूरे आयोजन में केवल बेहतरीन भोजन परोसने तक ही बात सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ ही उन पुरानी परंपराओं और स्थानीय समुदायों की अनसुनी कहानियों को भी लोगों के सामने लाने का एक अनूठा प्रयास किया गया है, जिनसे ये स्वादिष्ट व्यंजन सदियों से गहराई से जुड़े हुए हैं।
